गुजरात के मोरबी में हुए पुल हादसे ने देश को झकझोर कर रख दिया था, इस हादसे में सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पीएम मोदी ने भी घटनास्थल का दौरा किया था। इस दर्दनाक घटना में कई बच्चे अनाथ हो गए थे। जो बच्चे अनाथ हुए उनको लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें उन बच्चों के पुनर्वास के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी हो।
मोरबी पुल हादसे को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति एपी माई की खंडपीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का भुगतान किया है। कुल सात बच्चे हैं जिन्होंने मोरबी पुल दुर्घटना में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। उन्होंने यह भी कहा कि एक विशेष टीम द्वारा दुर्घटना की चल रही जांच की अंतिम रिपोर्ट तीन हफ्ते में आ जाएगी।
अनाथ बच्चों के पुनर्वास उपायों के बारे में सरकार की तरफ से त्रिवेदी ने पीठ से कहा कि हम (राज्य सरकार) उनकी स्कूली शिक्षा, भोजन का ख्याल रख रहे हैं। हमने उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत कवर किया है। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का हवाला देते हुए, पीठ ने महाधिवक्ता से उन बच्चों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों के बारे में एक हलफनामा दाखिल करने को कहा, जो त्रासदी में अपने पिता और मां की मृत्यु के कारण अनाथ हो गए थे।
गुजरात के मोरबी शहर में मच्छू नदी पर ब्रिटिश काल का बना हुआ पुल पिछले साल 30 अक्तूबर को ढह गया था। इस घटना में महिलाओं और बच्चों सहित 135 लोगों की मौत हो गई थी और 56 अन्य घायल हो गए थे। पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट से समय-समय पर जांच और त्रासदी के अन्य पहलुओं की निगरानी करने को कहा था, जिसमें पीड़ितों या उनके परिवारों को पुनर्वास और मुआवजा देना भी शामिल था।
विशेष रूप से, राज्य सरकार ने दुर्घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) नियुक्त किया था और इसने पिछले साल दिसंबर में एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी। कमल त्रिवेदी ने गुरुवार को अदालत को सूचित किया कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट तीन सप्ताह में उपलब्ध होगी और बाद में इसे पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार की दलील के बाद पीठ ने अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की।