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आसाराम आश्रम को झटका: अवैध कब्जे वाली जमीन पर अब सरकार करेगी कब्जा, गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 17 Apr 2026 03:32 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर

सार

गुजरात हाई कोर्ट ने आसाराम आश्रम ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी है। आश्रम पर सरकारी शर्तों के उल्लंघन और साबरमती नदी की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है।
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गुजरात हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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गुजरात हाई कोर्ट ने अहमदाबाद के मोटेरा इलाके में स्थित आसाराम आश्रम ट्रस्ट को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़ी आश्रम की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार 45,000 वर्ग मीटर से ज्यादा की जमीन पर फिर से कब्जा कर सकेगी।
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मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीएन रे की बेंच ने यह आदेश सुनाया। बेंच ने सिंगल जज के उस पुराने फैसले को सही माना, जिसमें अहमदाबाद कलेक्टर के आदेश को बरकरार रखा गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आश्रम ने बार-बार सरकारी शर्तों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अवैध कब्जे को वैध बनाने का कोई आधार नहीं बनता है।

यह जमीन दशकों पहले केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए आश्रम को दी गई थी। उस समय लगभग 33,980 वर्ग मीटर जमीन आवंटित हुई थी। लेकिन सरकार ने कोर्ट को बताया कि आश्रम ने धीरे-धीरे करीब 50,000 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर लिया। सरकार ने जीपीएस और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए सबूत पेश किए। इन सबूतों से पता चला कि आश्रम ने सरकारी जमीन के साथ-साथ साबरमती नदी के किनारे वाली जमीन पर भी कब्जा किया है। अपनी टिप्पणियों में, कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता लगातार नियमों का उल्लंघन करता रहा है और यह माना कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई भी न्यायसंगत आधार नहीं बनता है।
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सरकारी वकील जीएच विर्क ने कोर्ट को बताया कि जमीन वापस लेने की कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। इसमें कई बार नोटिस दिए गए, निरीक्षण हुआ और 20 से ज्यादा बार सुनवाई की गई। उन्होंने कहा कि आश्रम ने खुद अवैध निर्माण को वैध करने की अर्जी दी थी, जो एक तरह से नियमों के उल्लंघन की स्वीकारोक्ति थी। अब सरकार लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 202 के तहत नया नोटिस जारी कर जमीन का कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी।

आश्रम ने सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए इस आदेश पर चार हफ्ते की रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर आश्रम जमीन खाली करने का लिखित वादा (अंडरटेकिंग) दे, तभी कोई अंतरिम राहत मिल सकती है। 
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यह जमीन नरेंद्र मोदी स्टेडियम और सरदार पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास स्थित है। सरकार इस जमीन का इस्तेमाल खेल सुविधाओं के विकास के लिए करना चाहती है। यह इलाका 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और भविष्य के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की योजना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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