गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के संबंध में दर्ज नौ मामलों को वापस लेने जा रही है। गृहमंत्री हर्ष सांघवी ने इस बारे में जानकारी दी है।
गुजरात सरकार ने 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के संबंध में दर्ज नौ मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने शुक्रवार को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े नौ मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। इन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किए गए हैं।
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हार्दिक पटेल ने सरकार के इस फैसले पर कहा कि मैं भाजपा सरकार को मेरे और कई अन्य पाटीदार युवाओं के खिलाफ दर्ज राजद्रोह सहित मामलों को वापस लेने के लिए धन्यवाद देता हूं। इस फैसले से करीब 30 से 35 युवाओं को फायदा होगा। बता दें कि हार्दिक पटेल 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से जुड़े थे।
पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के पूर्व सदस्य दिनेश बंभानिया ने दावा किया कि इन नौ मामलों को वापस लेने के बाद अब करीब 50 मामले रह जाएंगे। बता दें कि 25 अगस्त, 2015 को अहमदाबाद में पटेल समुदाय की महारैली के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के बाद शहर की अपराध शाखा ने हार्दिक पटेल और उनके तीन सहयोगियों को गिरफ्तार किया और उन पर आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया था। सूरत पुलिस ने भी हार्दिक पटेल के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया था।