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फर्जी मुठभेड़: शीर्ष कोर्ट में गुजरात सरकार ने याचिकाकर्ताओं पर जताया संदेह, कहा- अन्य राज्य क्यों नहीं दिखते?

Mon, 10 Apr 2023 06:18 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एस के कौल और ए अमानुल्लाह की पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं के मकसद उनके अधिकारों के बारे में गंभीर संदेह जताते हुए कहा कि क्या इन दस्तावेजों को अजनबियों के साथ साझा किया जाना चाहिए?
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात पुलिस द्वारा 2002 और 2006 के बीच की गईं कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, गुजरात सरकार ने याचिकाकर्ताओं के उद्देश्य और अधिकारों पर सवाल खड़े करते हुए रिकॉर्ड साझा करने का विरोध किया। सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ता उन राज्यों में होने वाली मुठभेड़ों के बारे में चिंतित नहीं हैं जहां वे रहते हैं। उनका पूरा ध्यान केवल गुजरात पर केंद्रित है।

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राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एस के कौल और ए अमानुल्लाह की पीठ के सामने याचिकाकर्ताओं के मकसद उनके अधिकारों के बारे में गंभीर संदेह जताते हुए कहा कि क्या इन दस्तावेजों को अजनबियों के साथ साझा किया जाना चाहिए?

सोमवार को सुनवाई की शुरुआत में जब पीठ ने अपने पहले के आदेश का हवाला दिया तो एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य ने कुछ नहीं किया है। इस पर सरकार का पक्ष रख रहे तुषार मेहता ने कहा कि  अन्य राज्यों में रहने वाले लोगों ने मुठभेड़ों की विशेष अवधि की पहचान की है। साथ ही अन्य राज्यों में (जहां वे रहते हैं) भी मुठभेड़ें हुई हैं, लेकिन वे उनके लिए चिंतित नहीं हैं। इसके अलावा इन घटनाओं में जांच और पूछताछ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि ये एक चयनात्मक जनहित याचिका है, ऐसे में याचिकाकर्ताओं के साथ कोई सामग्री साझा नहीं की जानी चाहिए। फिलहाल पीठ ने इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई के लिए तय की है।  
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इससे पहले इस मामले में जनवरी माह में सुनवाई हुई थी। तब शीर्ष अदालत ने तीन मुठभेड़ों के बारे में गुजरात सरकार से संबंधित रिकॉर्ड मांगे थे। साथ ही पीठ ने कहा कि सभी पक्षकारों को सुनने के बाद यह सामने आया कि आखिरकार यह मुद्दा अब तीन मुठभेड़ों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

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जस्टिस एस के कौल और ए अमानुल्लाह की पीठ वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीज और गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच का अनुरोध किया गया है। 
दरअसल, बेदी समिति का गठन 2019 में किया गया था। समिति ने जांचे गए 17 में से तीन मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अंतिम रिपोर्ट में जस्टिस बेदी ने कहा था कि गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया तीन लोगों- समीर खान, कसम जाफर और हाजी हाजी इस्माइल को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था। समिति ने इंस्पेक्टर रैंक के तीन अधिकारियों सहित कुल नौ पुलिस अधिकारियों को आरोपित किया है।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस बेदी को गुजरात में 2002 से 2006 के बीच 17 मुठभेड़ों की जांच कर रही निगरानी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। समिति ने फरवरी 2021 में एक सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत को सौंपी थी। इससे पहले नरेंद्र मोदी के सीएम रहने के दौरान गुजरात के कथित 22 फर्जी मुठभेड़ मामलों की याचिका की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया था।

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