फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आचार्य देवव्रत: 'मिट्टी हो चुकी बंजर, प्राकृतिक खेती ही विकल्प', गुजरात के राज्यपाल ने जागरूकता पर दिया जोर

Wed, 25 Sep 2024 04:57 AM IST
दीपक कुमार शर्मा मनीष मिश्र, अमर उजाला

सार

मनुष्यों व मिट्टी की सेहत, जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने व किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मानते हैं कि इसका हल प्राकृतिक खेती है। प्राकृतिक खेती के क्या हैं नियम, कैसे किसानों को इससे जोड़ा जाए, इन विषयों पर मनीष मिश्र से बातचीत के प्रमुख अंश...    
 
विज्ञापन
आचार्य देवव्रत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्राकृतिक खेती से किसानों को अधिक से अधिक जोड़ने में दिक्कत कहां आ रही?

विज्ञापन

भारत में 30-40 वर्षों से रासायनिक खेती के विकल्प के तौर पर केंद्र व राज्य सरकारों ने जैविक खेती को प्रोत्साहित किया, लेकिन पूरे भारत में जैविक खेती के सफल मॉडल नहीं बन पाए। मैंने खुद तीन वर्षों तक जैविक खेती की, पर छोड़नी पड़ी। इसमें जो केंचुआ उपयोग किया जाता है वो गोबर खाता है, मिट्टी नहीं खाता। जब तापमान सामान्य से अधिक या कम होता है तो मर जाता है। केंचुआ गोबर की खाद को वर्मी कम्पोस्ट बनाने में 2 से 2.5 महीने लगा देता है। जब ज्यादा गोबर खेत में डालेंगे तो शत्रु कीट को खाना ज्यादा मिलेगा और वो ज्यादा पैदा होंगे। फसलों में बीमारियां ज्यादा बढ़ेंगी। इसलिए, जैविक खेती से न तो बीमारी की रोकथाम होगी, न ही उत्पादन पूरा मिलेगा इसलिए मैंने जैविक खेती को छोड़ दिया।

प्राकृतिक खेती का नियम क्या है?
जंगल में यूरिया, डीएपी कोई नहीं देता, लेकिन पेड़-पौधों में किसी पोषक तत्व की कमी नहीं होती। जब प्रकृति जंगल के पौधों में पूरी चीज स्वाभाविक रूप से देती है, तो खेत में क्यों नहीं देगी। जो नियम जंगल में लागू होते हैं, वही खेतों में काम करें, यही प्राकृतिक खेती है। प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं, केंचुआ और मित्र कीटों की खेती है। धरती का आर्गेनिक कार्बन बढ़ाने का काम यही करते हैं। हम धरती में जितने सूक्ष्म जीवाणुओं को बढ़ाएंगे, उतना मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन बढ़ता जाएगा। हमने गलती कहां की, जितने भी सूक्ष्म जीवाणु थे, उन्हें खत्म करते गए।
विज्ञापन


किसान जैविक व प्राकृतिक खेती से शुरू में कम उत्पादन से कैसे निपटें?
हमारे कृषि वैज्ञानिक बोलते हैं अगर पूरे देश में जैविक खेती होगी तो देश की श्रीलंका जैसी हालत होगी। देश भूखा मरेगा। मैं भी इस बात का समर्थन करता हूं कि अगर देश में जैविक खेती हुई तो देश भूखा मरेगा। हम जिस प्राकृतिक खेती की बात कर रहे हैं, वो जैविक खेती से अलग है। इस बात को हमारे किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों को भी समझना और समझाना पड़ेगा कि प्राकृतिक खेती और जैविक खेती अलग-अलग हैं।  ये जो किसानों को डराया जा रहा है वो बिल्कुल गलत है।
विज्ञापन


जो रसायन विदेशों में प्रतिबंधित हैं वे भारत में बिक रहे हैं, कैसे बचें?
ये सही है, लेकिन इसका सबसे सफल तरीका है लोगों में जागरूकता पैदा की जाए। हमें प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से प्राकृतिक खेती के बढ़ावे की बात कही। पीएम को किसानों की बहुत चिंता है। अगर सब मिलकर प्रचार करेंगे तो देश के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता निकलेगा। गुजरात में 10 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। जो विधि से खेती कर रहा है, उसकी इनकम बढ़ गई। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी हल प्राकृतिक खेती ही है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें