अगले वित्त वर्ष से गुजरात में लग सकता है फैट-टैक्स
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गुजरात की आनंदी बेन सरकार एक मामले में केरल सरकार के नक्शे कदम को फॉलो करने की सोच रही है। इसमें केरल की तरह गुजरात में भी रेस्टोरेंट चेन में बिकने वाले बर्गर, पिज्जा और दूसरे जंक फूड्स पर 14.5 प्रतिशत फैट-टैक्स लगाने पर विचार हो रहा है। ताकि प्रिवेन्टिव हेल्थकेयर के लिए पैसा जुटाया जा सके।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक गुजरात सरकार कई संभावनाओं पर विचार कर रही है। जीएसटी के अगले वित्त वर्ष से लागू होने की संभावना है और यह वैट सिस्टम से बिल्कुल अलग है। लिहाजा अगले वित्त वर्ष से फैट-टैक्स लगाने से पहले गुजरात सरकार को सभी संभावनाओं पर विचार करना है।
राज्य के वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक कई यूरोपीय देशों जैसे डेनमार्क और हंगरी में जंक फूड पर फैट टैक्स लगाया गया है। ताकि लोग जंक फूड से दूर रहे और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर के लिए पैसा जुटाया जा सके।
सूत्रों का कहना है, 'इस आइडिया को राज्य में भी लागू किया जा सकता है, जैसा कि गुजरात में भी जंक और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक फूड का उपभोग बहुत ज्यादा है। फैट-टैक्स का उपयोग जंक फूड के प्रति लोगों में जागरूकता जगाने के लिए भी किया जा सकता है। इससे पहले सरकार केरल और अन्य मॉडल्स का अध्ययन करेगी ताकि यह निर्णय लिया जा सके कि फैट-टैक्स को अगले वित्त वर्ष से लागू करना है या नहीं। इसलिए हो सकता है फैट-टैक्स को लेकर हमारे पास विशेष प्रावधान हो, या फिर यह मौजूदा टैक्स संरचना में भी संभव हो। हम इन सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं।'
हालांकि ऑर्गेनाइज्ड फास्ट फूड चेन्स, ट्रेड और इंडस्ट्री ने केरल में फैट-टैक्स का विरोध किया और गुजरात में भी ऐसा हो सकता है।