हालांकि, अचानक ही भाजपा नेताओं को गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी की भारी जीत के प्रति आशंका बढ़ गई है। पार्टी की इस चिंता के पीछे कांग्रेस का वह ‘छिपा हुआ प्लान’ हो सकता है, जिसके माध्यम से कांग्रेस गुजरात की लड़ाई में पीछे रहकर भी भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। इस बीच भाजपा की जीत में किसी तरह की कमी न रह जाए, इसे लेकर पार्टी में गंभीर चिंतन-मंथन का दौर शुरू हो गया है।
गुजरात भाजपा सूत्रों के मुताबिक, इस बार पार्टी 150 से ज्यादा सीटों पर सहज जीत का अनुमान लगा रही थी, इसके साथ ही लगभग एक दर्जन सीटों पर थोड़ी कोशिश के बाद जीत सुनिश्चित करने की बात कही जा रही थी। पार्टी का अनुमान था कि कांग्रेस की कमजोर तैयारी के बीच यदि आम आदमी पार्टी भी सक्रिय होती है तो इससे विरोधी और सत्ता विरोधी लहर के वोटों में बंटवारा हो जाएगा, इससे पार्टी को उन सीटों पर भी जीतने में सफलता मिल जाएगी, जिन पर उसकी जीत में अब तक संशय रहा करता था।
इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पार्टी गांधीनगर में हुए निकाय चुनाव परिणामों को आधार बनाकर सोच रही थी, जहां विरोधी मतों का बंटवारा हो गया और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को लगभग बराबर प्रतिशत में वोट मिले। इसका लाभ भाजपा को हुआ और वह यहां आसान जीत हासिल करने में सफल रही।
दिल्ली वाली ‘गलती’ कर सकती है कांग्रेस
इसी बीच कांग्रेस की कमजोर चुनावी तैयारी देखकर बीजेपी के अंदरखाने इस बात की चिंता शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस गुजरात में भी दिल्ली वाला प्लान अपनाएगी, जिससे भाजपा की जीत की राह कठिन हो सकती है। दरअसल, दिल्ली विधानसभा 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने शुरूआती दौर में बेहतर चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही चुनाव करीब आने लगे, कांग्रेस को यह एहसास हो गया कि वह इस लड़ाई को नहीं जीत सकती, लेकिन उसकी मजबूती से वोटों का बंटवारा हो जाएगा और इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है और वह दिल्ली में मजबूत हो सकती है।
आरोप लगाए जाते हैं कि इसके बाद कांग्रेस ने खुद को चुनाव में पीछे कर लिया और आम आदमी पार्टी दिल्ली में दोबारा बड़े बहुमत के साथ जीत हासिल करने में कामयाब रही। भारी भरकम चुनाव प्रचार के बाद भी भाजपा केवल आठ सीटों पर सिमट कर रह गई।
भाजपा के लिए चिंता की बात यह है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में अब अधिकतम तीन महीने का समय शेष रह गया है, लेकिन कांग्रेस अभी भी जमीनी स्तर पर कोई बड़ी तैयारी करती हुई नहीं दिखाई पड़ी है। पिछली बार भाजपा को केवल 99 सीटों पर समेटकर रख देने वाले राहुल गांधी इस समय भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं और वे इस यात्रा के बीच में चुनाव प्रचार के लिए कितना समय निकाल पाएंगे, कहा नहीं जा सकता।
गुजरात कांग्रेस में इस समय ऐसा कोई नेता नहीं है जो अपने दम पर कांग्रेस की चुनावी नाव को नदी के पार लगा सके। कांग्रेस अभी तक अपना चुनाव प्रचार तक शुरू नहीं कर सकी है, और पार्टी के कुछ नेता अभी भी भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने में जुटे हैं। लिहाजा भाजपा थिंक टैंक का सोचना है कि कांग्रेस इस बार गुजरात में भी दिल्ली वाली रणनीति पर चल सकती है।
इकट्ठे हो जाते हैं विरोधी वोट बैंक
दरअसल, इसी वर्ष की शुरूआत में उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। उत्तर प्रदेश चुनाव में यह बात देखी गई थी कि कांग्रेस के मजबूत चुनाव प्रचार के बाद भी सरकार विरोधी मतदाताओं ने बेहद स्पष्ट रूख अपनाया। उन्होंने केवल उसी को वोट दिया जो उन्हें भाजपा को हराने में सक्षम दिखाई पड़ा। इससे पूरा वोट बैंक समाजवादी पार्टी के पीछे लामबंद हो गया और कांग्रेस-बसपा जैसे दल अपने ऐतिहासिक निम्नतम स्कोर पर रुक गए। पंजाब में भी आम आदमी पार्टी ने एक तरफा प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी मत पूरी तरह आम आदमी पार्टी के पीछे लामबंद हो गया। भाजपा नेताओं की चिंता है कि कांग्रेस की कमजोर लड़ाई में गुजरात में भी ऐसा हो सकता है, और ऐसा हुआ तो पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।
भाजपा नेताओं की चिंता है कि इस तरह की कोशिश गुजरात में भी हुई तो आम आदमी पार्टी को गुजरात में भी खड़ा होने का अवसर मिल जाएगा, जो वो बिल्कुल नहीं चाहेंगी। भाजपा को लग रहा है कि कांग्रेस स्वयं को केवल सौराष्ट्र-कच्छ और आदिवासी इलाकों तक में समेटकर रख सकती है जहां वह मजबूत है, जबकि कमजोर सीटों पर वह बैकफुट ले सकती है जिसका लाभ आम आदमी पार्टी को मिल सकता है।
अमित शाह हुए सक्रिय
यही कारण है कि भाजपा ने अपने कील-कांटे दुरूस्त करने में पूरी जान लगा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले छह महीने से लगातार गुजरात जा रहे हैं और विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास कर लोगों को अपने साथ जोड़ने में जुटे हैं। कच्छ यात्रा के दौरान गांधीनगर कार्यालय कमलम में भाजपा कार्यकर्ताओं से एक-एक कर मुलाकात करना और विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय जानने को भी उनकी गुजरात को लेकर चिंता को ही प्रमुख कारण बताया गया था।
भाजपा के चुनावी कार्यक्रम की अनौपचारिक शुरूआत
भाजपा के शीर्ष नेता अमित शाह ने रविवार को सौराष्ट्र में भगवान सोमनाथ के दर्शन कर अपनी चुनावी यात्रा की अनौपचारिक शुरूआत कर दी है। यह वह क्षेत्र है जहां भाजपा को सबसे कमजोर माना जाता है। वे 14-15 सितंबर को सूरत के इंनडोर स्टेडियम में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित भी करेंगे और पार्टी की चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे। सूरत को महत्त्व देकर भाजपा अपने गढ़ को मजबूत बनाए रखना चाहती है जहां के नगर निगम में 27 सीटें हासिल कर केजरीवाल गुजरात विजय करने का प्लान बना रहे हैं।