गुजरात में नाराज चल रहे पटेलों और व्यापारियों को थामने की कवायद अब भाजपा ने शुरू कर दी है। इन दोनों ही समुदायों पर भगवा परिवार की कवायद का असर कितना होगा यह 18 दिसंबर को चुनाव परिणाम के दिन पता चलेगा, मगर चुनाव में भाजपा की राह आसान बनाने के लिए परिवार की कोशिशें जारी हैं।
इन कोशिशों के तहत ही मोरारी बापू 2 से 10 दिसंबर तक गुजरात के सूरत में जनता को राम कथा का रसपान कराएंगे। यहां विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पहले चरण के अंर्तगत 9 दिसंबर को होने हैं, लेकिन बापू के राम कथा आयोजन से जुड़े रणछोड़ भाई का कहना है कि कथा को राजनीति से जोड़ना वाजिब नहीं है।
उन्होंने कहा कि बापू की कथा में कोई राजनीति न हो इसलिए किसी नेता अथवा राजनीतिक दल के नुमाइंदों को नहीं बुलाया गया है। इसमें पूरी तरह से सामान्य जनता कथा सुनने के मकसद से आएगी। कथा का उद्देश्य सैन्य शहीदों के परिवारवालों की मदद के लिए धन जुटाना है और यह कवायद पहले से होती रही है, मगर इस दफे की कवायद बड़ी है।
क्या है आयोजन
सूरत में डायमंड के व्यापार से जुड़े रणछोड़ भाई को संघ से जुड़ा माना जाता है, इसलिए 2 दिसंबर से शुरू हो रही मोरारी बापू की राम कथा को परदे के पीछे से संघ की कवायद माना जा रहा है। इस दफे के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चुनौती सूरत में दिख रही है।
यहां पार्टी को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एक तो आरक्षण को लेकर पटेल नाराज हैं तो दूसरी ओर जीएसटी की वजह से टैक्सटाइल और हीरा व्यापारी भाजपा से खफा हैं। दोनों ही भाजपा के परंपरागत मतदाता रहे हैं। इनकी नाराजगी भाजपा को भारी न पड़े इसलिए भगवा परिवार की ओर से तमाम कोशिशें जारी हैं।
मोरारी बापू की कथा को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है, मगर आयोजन समिति से जुड़े रणछोड़ भाई का कहना है कि राम कथा के लिए मोरारी बापू का समय ढाई साल पहले से ही लिया गया है। तब किसको पता था कि चुनाव की तिथियां इसी दौरान पड़ेंगी।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि पता होता कि राम कथा के राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे तो वे आयोजन ही नहीं रखते। अथवा इसकी तिथि आगे पीछे कर लेते।