दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'एन इनसिग्निीफिकेंट मैन' पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना रुख साफ कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि निर्माताओं के सृजनात्मक अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। कोर्ट ने बाकी अदालतों को सलाह दी वो कलाकारों की आजादी में अत्यधिक निष्क्रियता बरतें।
फिल्मों को लेकर कोर्ट का ये रुख विवादों में आई फिल्म 'पद्मावती' के लिए काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, कोर्ट ने केजरीवाल के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘एन इनसिग्निीफिकेंट मैन’ के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, ‘एक कलाकार अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल उस हद तक कर सकता है जहां तक कानून इजाजत देता हो। विचारोत्तेजक फिल्में जरूरी नहीं है कि किसी व्यक्ति के नैतिक मापदंडों के अनुरूप हो।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या फिल्म निर्माताओं को फिल्म बनाने से पहले पात्रों के परिवार के सदस्यों के अनुमति लेनी होगी?
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याचिकाकर्ता नचिकेता वाल्हेकर कहना था कि डॉक्यूमेंट्री में उस घटना के मूल वीडियो क्लिप को शामिल किया गया है जिसमें वह खुद शामिल था। नचिकेता पर आरोप है उसने वर्ष 2013 में दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में एक कार्यक्रम में केजरीवाल के ऊपर स्याही फेंका था। उसका कहना है कि यह मामला अभी निचली अदालत में लंबित है लेकिन डॉक्यूमेंट्री में उसे दोषी के तौर पर दिखाया जा रहा है। इससे उसकी छवि खराब हो रही है।