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Gujarat Election: 2017 के दूसरे सबसे अमीर प्रत्याशी ने क्यों छोड़ी AAP, सौराष्ट्र के समीकरण पर इसका क्या असर?

Tue, 08 Nov 2022 01:09 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आइए जानते हैं कौन हैं इंद्रनील राजगुरु? क्यों उन्हें गुजरात के सबसे अमीर नेताओं में गिना जाता है? उनके पार्टी छोड़ने से AAP को कितना नुकसान हो सकता है? 
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गुजरात चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुजरात चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी (AAP)  के गुजरात इकाई के नेता इंद्रनील राजगुरु ने AAP का साथ छोड़ दिया है। इसुदान गढ़वी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने के बाद उन्होंने ये एलान किया। पूर्व विधायक इंद्रनील राजगुरु ने इसके खिलाफ पार्टी के अंदर विरोध भी जताया था। इंद्रनील वापस अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में चले गए हैं। सात महीने पहले ही वह कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में आए थे। 
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आइए जानते हैं कौन हैं इंद्रनील राजगुरु? क्यों उन्हें गुजरात के सबसे अमीर नेताओं में गिना जाता है? उनके पार्टी छोड़ने से AAP को कितना नुकसान हो सकता है? 
 

पहले इंद्रनील राजगुरु के बारे में जान लीजिए
इंद्रनील राजगुरु सौराष्ट्र के बड़े नेताओं में शामिल हैं। 2012 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राजकोट पूर्व से विधानसभा चुनाव जीता था। 2017 में राजगुरु राजकोट पश्चिम से तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपानी के खिलाफ चुनाव लड़े थे। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी साल अप्रैल में राजगुरु कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे।  


 

गुजरात के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल थे राजगुरु
56 साल के इंद्रनील राजगुरु 12वीं पास हैं। 2017 में दिए गए हलफनामे के अनुसार राजगुरु के पास कुल 141 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह 2017 में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में दूसरे सबसे अमीर उम्मीदवार थे। बताया जाता है कि राजगुरु आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाने के इच्छुक थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल इसके लिए राजी नहीं हुए। इससे नाराज राजगुरु आप छोड़कर वापस कांग्रेस में लौट आए। 
 

आप छोड़ने के बाद क्या बोले राजगुरु? 
इंद्रनील राजगुरु ने कहा, 'हम हमेशा कांग्रेस के साथ रहे। मेरा यहां से जाना मेरे परिवार को भी नामंजूर था। मैं भाजपा को हराने के लिए आम आदमी पार्टी में शामिल हुआ था, लेकिन मुझे लगा कि वे बीजेपी की तरह लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ये लोग भाजपा की बजाय कांग्रेस को ही कमजोर करने में जुटे हैं। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ दी।'
 

राजगुरु के जाने से AAP पर क्या असर होगा? 
इसे समझने के लिए हमने गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार वीरांग भट्ट से बात की। उन्होंने कहा, 'सौराष्ट्र में आम आदमी पार्टी के पास इंद्रनील राजगुरु के तौर पर एक मजबूत चेहरा था। 2017 में जब राजगुरु ने तत्कालीन मुख्यमंत्री विजयभाई रूपाणी के खिलाफ राजकोट पश्चिम से चुनाव लड़ा था, तब उन्हें 77,831 वोट मिले थे। सौराष्ट्र की करीब 30 सीटों पर राजगुरु का असर माना जाता है। AAP को सौराष्ट्र और राजकोट में काफी उम्मीदें हैं। ऐसे में राजगुरु का जाना उनके लिए एक झटके की तरह है।' 
 
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2017 में क्या रहे थे सौराष्ट्र-कच्छ के नतीजे?
2017 में सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा के मुकाबले बेहतर रहा था। यहां की 54 सीटों में से कांग्रेस ने 30 पर जीत दर्ज की। बीजेपी को 23 सीटें मिलीं थीं। राजकोट जिले की बात करें तो यहां भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी जिले की आठ में से छह सीटें जीतने में सफल रही थी। पाटीदार आंदोलन के बाद भी इस तरह के प्रदर्शन को उस वक्त के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के लिए बड़ी सफलता माना गया था।
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