गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
गुजरात में अब तक मुस्लिम विधायकों का प्रतिनिधित्व?
गुजरात में करीब 10 फीसदी मुस्लिम हैं। इस लिहाज से देखें तो राज्य विधानसभा में आबादी के लिहाज से करीब 18 विधायक हो सकते हैं। हालांकि, गुजरात की किसी भी विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या कभी सात से ज्यादा नहीं रही। 2017 में तीन मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर विधायक बने थे। तीनों कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 2012 विधानसभा चुनाव में महज दो मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतने में सफल रहे थे।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा-आप-कांग्रेस के उम्मीदवारों में मुस्लिम कितने?
कांग्रेस ने मौजूदा चुनाव में छह मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। इनमें सूरत पूर्व से असलम साइकिलवाला, वांकानेर से मोहम्मद जावेद पीरजादा, अबडास सीट से ममदभाई जुंग जत, वागरा से सुलेमान पटेल, दरियापुर सीट से ग्यासुद्दीन शेख, जमालपुर खड़िया से इमरान खेड़ावाला को टिकट दिया था। आम आदमी पार्टी ने तीन मुस्लिम चेहरों को अपना उम्मीदवार बनाया था। दरियापुर से ताज कुरैशी, जंबसुर से साजिद रेहान और जमालपुर खेड़िया से हारुन नागोरी को टिकट दिया था। वहीं, भाजपा ने किसी भी मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाया था।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
किन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर?
2011 की जनगणना के मुताबिक गुजरात में कुल मुस्लिम आबादी करीब 10 फीसदी है। भुज और भरूच जिलों में मुस्लिमों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। अहमदाबाद में वेजलपुर, दरियापुर, जमालपुर खाड़िया और दानीलिमड़ा जैसी सीटों पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में रहते हैं। कुल 20 सीटें ऐसी थीं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 20 फीसदी से ज्यादा थी। इनमें से चार अहमदाबाद, तीन-तीन सीटें भुज और भरूच जिले में थीं। जमालपुर खड़िया गुजरात की इकलौती सीट थी, जहां मुस्लिम मतदाता 50 फीसदी से भी ज्यादा थे। इसके अलावा दाणिलिमड़ा में 48%, दरियापुर में 46%, वागरा में 44%, भरूच में 38%, वेजलपुर में 35%, भुज में 35%, जंबुसर में 31% बापूनगर में 28% और लिंबायत में 26 फीसदी मुस्लिम वोटर थे।
इन 10 सीटों पर पिछले नतीजे
2017 में इन 10 सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीटों में से पांच सीटें भाजपा और पांच सीटें कांग्रेस को मिलीं थीं। 2012 की बात करें तो इन 10 में से आठ सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, कांग्रेस को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था।