पाटीदार आक्रोश और किसान असंतोष से उबल रहे सौराष्ट्र में भाजपा ने जातीय समीकरण की नई बिसात बिछाई है। पाटीदारों खासकर पाटीदार युवाओं के भाजपा के पाले से खिसकने से होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए भारतीय जनता पार्टी ने गैरपाटीदार जातियों का मजबूत समीकरण बनाने की रणनीति अपनाई है।
साथ ही पटेलों और गैर पटेलों के बीच पुराने समय से चलने वाले अंतर्विरोधों को उभारकर भाजपा यहां अपनी चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश में है।इसीलिए सौराष्ट्र में अपनी चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उस मनगढ कांड की याद दिला रहे हैं जो दशकों पहले राजपूतों और पटेलों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के कारण सुर्खियों में आया था।
अहमदाबाद से निकलकर राजकोट, जामनगर, द्वारिका, पोरबंदर, सोमनाथ, जूनागढ़, गोंडल, अमरेली, भावनगर कहीं भी लोगों से बात कीजिए, अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच यह राजनीतिक विभाजन साफ नजर आता है। द्वारिका जिले की खंभालिया विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय भाजपा नेता डाडू भाई चावड़ा से बात होती है। चावड़ा आश्वस्त हैं कि कुछ भी हो जाए आखिर में भाजपा की ही सरकार बनेगी।
पाटीदार प्रभाव को पूरी तरह नकारते हुए डाडू भाई कहते हैं कि भाजपा के साथ दूसरी जातियां पूरी तरह एकजुट हैं। इसलिए अगर पाटीदार भाजपा को वोट नहीं भी देते हैं तो कोई खास फर्क पड़ने वाला नहीं है। वैसे पाटीदार भी भाजपा को छोड़कर नहीं जाएंगे। चावड़ा बताते हैं कि वो आहीर बिरादरी से हैं और उनकी बिरादरी में भाजपा का जोर है।
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वैसे इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार कालू भाई चावड़ा भी आहीर बिरादरी से हैं। लेकिन कुछ आगे चलने पर विक्रम भाई से मुलाकात होती है, जो चाय की अपनी दुकान चलाते हैं और उनकी दुकान पर आसपास के लोग आते जाते रहते हैं। पूछने पर पहले तो झिझकते हैं, फिर कहते हैं कि कांग्रेस की बात लोग ज्यादा करते हैं, लेकिन भाजपा भी कमजोर नहीं है। विक्रम भाई के मुताबिक कांटे का मुकाबला है। द्वारिका से आगे पोरबंदर के रास्ते पर राकेश भाई भी भाजपा की बात करते हैं।
वहां बैठे दूसरे लोग भी भाजपा और मोदी को पहली पसंद बताते हैं। पूछने पर पता चलता है कि ये सारे लोग गैर पाटीदार ओबीसी कोली समुदाय से आते हैं। कोली जिन्हें कोली पटेल भी कहा जाता है, पहले से ही भाजपा के साथ हैं। राज्य भाजपा के बड़े नेता और मंत्री पुरषोत्तम सोलंकी कोली पटेलों के नेता हैं। कभी सुरेंद्र नगर के सांसद सोमा भाई पटेल भी कोली समुदाय के नेता होते थे, जो 2008 में मनमोहन सरकार के खिलाफ अविश्वास मत के दौरान पाला बदल कर कांग्रेस में चले गए थे। सोमा भाई सुरेंद्र नगर जिले की लीमड़ी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन कोलियों में अब उनकी पकड़ कमजोर हो गई है।
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