भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया उसमें वह कई गलतियां कर बैठे थे जिसकी वजह से उन्हें ट्वीट डिलीट करना पड़ा। दरअसल, राहुल ने लिखा था कि जुमलों की बेवफाई मार गई,नोटबंदी की लुटाई मार गई, GST सारी कमाई मार गई, बाकी कुछ बचा तो- महंगाई मार गई, बढ़ते दामों से जीना दुश्वार, बस अमीरों की होगी भाजपा सरकार? इसके साथ राहुल ने कुछ आंकड़े दिखाते हुए एक फोटो भी पोस्ट की थी। उस तस्वीर में ही गलतियां थी।
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क्या थी गलती: फोटो में गैस सिलेंडर का जिक्र करते हुए लिखा था कि 2014 यानी मनमोहन सरकार के वक्त गैस सिलेंडर 414 रुपए का था जो 2017 में 742 रुपए का हो गया। यहां लिखा जाना था कि 79 प्रतिशत कीमत बढ़ी लेकिन इसकी जगह लिखा गया कि कीमत 179 प्रतिशत बढ़ी।
इतना ही नहीं आगे लिखा था कि दालों के रेट 177 प्रतिशत बढ़े (यहां 77 प्रतिशत लिखा जाना था), वहीं टमाटर के रेट 185 की वजह 285 प्रतिशत रेट बढ़ते बताए गए। फोटो में कई और ऐसी ही गलतियां भी थीं।
राहुल ने यह ट्वीट किया था
इससे पहले पूछ चुके हैं छह सवाल
राहुल गांधी
अपने छठे सवाल में राहुल ने बेरोजगारी का जिक्र करते हुए लिखा था कि भाजपा की दोहरी मार, एक तरफ युवा बेरोजगार, दूसरी तरफ लाखों फिक्स पगार और कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारी बेजार, 7वें वेतन आयोग में ₹18000 मासिक होने के बावजूद फिक्स और कॉन्ट्रेक्ट पगार ₹5500 और ₹10000 क्यों?
तीसरे सवाल में राहुल ने लिखा था कि 2002-16 के बीच ₹62,549 Cr की बिजली खरीद कर 4 निजी कंपनियों की जेब क्यों भरी? सरकारी बिजली कारखानों की क्षमता 62% घटाई पर निजी कंपनी से ₹3/ यूनिट की बिजली ₹24 तक क्यों खरीदी? जनता की कमाई, क्यों लुटाई?
राहुल ने अपने दूसरे सवाल में लिखा था कि 1995 में गुजरात पर कर्ज-9,183 करोड़, 2017 में गुजरात पर कर्ज-2,41,000 करोड़, यानी हर गुजराती पर ₹37,000 कर्ज। आपके वित्तीय कुप्रबन्धन व पब्लिसिटी की सजा गुजरात की जनता क्यों चुकाए?
अपने पहले सवाल में राहुल ने लिखा था कि 2012 में वादा किया कि 50 लाख नए घर देंगे, 5 साल में बनाए 4.72 लाख घर। प्रधानमंत्रीजी बताइए कि क्या ये वादा पूरा होने में 45 साल और लगेंगे?