प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27-28 अगस्त के अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे में पार्टी के उन सभी ढीले पेंचों को कस दिया है, जिनके कारण पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही थी। पीएम ने गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में एक कोर कमेटी का गठन कर उसमें राज्य के सभी कोनों के वरिष्ठ नेताओं को शामिल कर हर हिस्से में भाजपा की जीत का रास्ता सुनिश्चित कर दिया है। साथ ही गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल के बीच ‘सत्ता’ की सीमाएं भी तय कर दी हैं, जिनके बीच बेहतर सामंजस्य न होने से चुनाव परिणाम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात यात्रा के दौरान एक कोर कमेटी का गठन कर दिया है, जो इस साल के अंत में होने वाले चुनावों की हर गतिविधि पर बारीक निगाह रखेगी। इस कमेटी में गुजरात के चारों कोनों से पार्टी के अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। राज्य के गृहमंत्री हर्ष संघवी इस कमेटी के सबसे महत्त्वपूर्ण सदस्य हैं, जो सभी सदस्यों के साथ बैठकें कर चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देंगे। हर्ष सांघवी दक्षिण गुजरात से आते हैं जिसकी भूमिका गुजरात में सरकार बनाने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने इस बार गुजरात दौरे में प्रदेश के नेताओं से पहले अलग-अलग और बाद में साथ बैठक कर उनकी राय ली। उन्होंने पहली बैठक प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ ही की और उनसे सरकार के कामकाज, जनता की प्रदेश सरकार को लेकर राय और चुनावी तैयारियों पर बातचीत की। इसके बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल से अलग बात की और पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर उनका पक्ष जाना।
दरअसल, गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल मुख्य रूप से महाराष्ट्र क्षेत्र से आते हैं। गुजरात के भाजपा नेताओं के साथ उनके तालमेल बेहतर न होने की बात हमेशा कही जाती रही है। माना यहां तक जाता है कि भूपेंद्र पटेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही पाटिल राज्य सरकार की सत्ता में ज्यादा दखल देने लगे थे, जिससे स्थानीय नेता स्वयं को असहज महसूस कर रहे थे। अब तक प्रदेश नेता इस मामले पर शांत थे, लेकिन इस कारण चुनाव में असर पड़ने की आशंका देखते हुए प्रदेश के दूसरे नेता सक्रिय हो गए हैं।
कहा जाता है कि इस बात की पूरी जानकारी पीएम तक पहुंचा दी गई थी। यही कारण है कि इस बार पीएम के दौरे के समय पाटिल का कद घटता हुआ दिखाई पड़ा। माना जाता है कि पीएम ने उन्हें सभी नेताओं से बेहतर तालमेल बिठाने का ‘सख्त’ निर्देश दिया है।