पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अभी लगाम लगाई गई है, लेकिन सरकार बहुत ज्यादा देर तक इसे नियंत्रित नहीं रख पाएगी और इसके बढ़ते ही महंगाई दर बेलगाम हो सकती है। बीते अगस्त और सितंबर महीने में महंगाई दर 7.0 और 7.4 फीसदी क्रमशः रही थी। गैस और सब्जियों की कीमतों में उछाल के कारण इस महीने में भी यह इसके आसपास रह सकती है। दीपावली बाद कई महत्त्वपूर्ण चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जाहिर की जा रही है जो लोगों की समस्याएं बढ़ाएंगे।
दूसरे मुद्दों से ढक जाती है महंगाई
राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि यूपी-उत्तराखंड सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पूर्व भी महंगाई अपनी चरम पर थी। विपक्ष को उम्मीद थी कि जनता महंगाई से त्रस्त होकर भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकेगी और उसकी जीत की राह आसान हो जाएगी। लेकिन चुनाव परिणाम बताते हैं कि भाजपा ने सफलतापूर्वक इस फैक्टर को ध्वस्त करने में कामयाबी पाई। उसने यूपी-उत्तराखंड में लगातार सत्ता में वापसी करने का इतिहास बनाते हुए चार राज्यों में सत्ता हासिल की। यह उसके इलेक्शन मैनेजमेंट का बड़ा प्रमाण माना जा सकता है।
धीरेंद्र कुमार के अनुसार, लेकिन यह केवल मैनेजमेंट का मामला नहीं है। भाजपा सरकारों ने कोरोना काल के दौरान लोगों को राशन योजना, आर्थिक सहायता योजनाओं और रोजगार के मोर्चे पर जो काम किया था, भाजपा को उसका लाभ मिला था। पीएम किसान आर्थिक सहायता योजना, आवास योजना और उज्ज्वल गैस योजना ने महंगाई के असर को कम करने में बड़ी मदद की थी। पोस्ट पोल सर्वे में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि कल्याणकारी योजनाओं ने भाजपा की छवि बनाने में मदद की जिसका उसे लाभ मिला।
उन्होंने कहा कि तेज महंगाई के बाद भी यदि भाजपा इसे बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बनने देने में सफल हो रही है, तो उसका बड़ा कारण यह हो सकता है कि वह मतदाताओं में अपने लिए बेहतर विश्वास पैदा करने में सफल हो रही है। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार योजनाओं का उदघाटन और लोकार्पण ने जनता में भाजपा के लिए नकारात्मक सोच को कम करने में मदद की है। चूंकि मजबूत और विश्वसनीय चेहरे की कमी के कारण विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को प्रभावी तरीके से घेरने में भी असफल होता दिखाई पड़ रहा है, भाजपा को इसका दोहरा लाभ मिल रहा है।
जनता के बीच महंगाई बड़ा मुद्दा
गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन भाई मोडवाडिया ने अमर उजाला से कहा कि इस चुनाव में जनता के बीच बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार तीन ही मुद्दे प्रमुख हैं। प्रदेश में युवाओं के पास कोई रोजगार नहीं है, इसके लिए वे कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अब चुनाव के समय नियुक्ति पत्र बांटकर युवाओं को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के कारण पूरे देश के साथ-साथ गुजरात की जनता परेशान है, लेकिन उसे भड़कीले लेजर शो दिखाकर इन मुद्दों से उसका ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। लेकिन सरकार भी जानती है कि उसकी यह कोशिश कामयाब नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी यात्राओं में जनता के बीच इन्हीं मुद्दों को उठा रही है और इसका असर भी दिखाई पड़ रहा है। लोग सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। यही कारण है कि सरकार घबराई हुई है और पीएम मोदी विभिन्न आयोजन कर इन मुद्दों से लोगों को भटकाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी के बार-बार गुजरात आने का कारण भी यही है कि भाजपा को इस बार अपनी जीत का विश्वास नहीं है।