नवसारी जिले की गणदेवी विधानसभा सीट पर 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। तब भाजपा के नरेशभाई मगनभाई पटेल ने कांग्रेस के सुरेशभाई मगनभाई हलपति को 57,261 वोट से हराया था। इस सीट पर कुल 61.88 प्रतिशत वोट पड़े थे। ये विधानसभा नवसारी संसदीय क्षेत्र में आती है। जहां से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल सांसद हैं।
इस विधानसभा क्षेत्र के ज्यादातर लोग मानते हैं कि इलाके में समस्याएं तो हैं, लेकिन खुल कर कुछ नहीं कहते हैं। जो लोग बोलते हैं उनका कहना है कि वह महंगाई, बेरोजगारी से परेशान हैं।
जनककुमार कांतिलाल पंड्या गणदेवी नगर में रहते हैं। उनका कहना है कि इलाके के ज्यादातर लोग खेती के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। यहां गणदेवी शुगर फैक्टरी है। आसपास के लगभग 117 से ज्यादा गांवों के किसान यहां गन्ना बेचने आते हैं।
गणदेवी नगर में देसाई समाज बहुमत है। यहां के किसान ज्यादातर चीकू और आम की फसल उगाते हैं। विद्याबेन कांतिलाल पंड्या महंगाई से परेशान हैं। इसके लिए वह बढ़ती जनसंख्या को जिम्मेदार मानती हैं। उनका कहना है कि जनसंख्या बढ़ेगी तो महंगाई भी अपने आप बढ़ेगी।
अय्याज शेख को शिकायत है कि यहां खिलाड़ियों के लिए कोई स्पोर्टस कॉम्पलेक्स नहीं है। बार-बार शिकायत करने पर भी कोई काम नहीं हो रहा है। हालांकि स्थानीय नेताओ ने इस बारे में आश्वासन जरुर दिया है। उनका मानना है कि खेल में आगे बढ़ने के लिए काम्पलेक्स की जरुरत है।
शेख के मुताबिक, भले ही गणदेवी को तहसील घोषित किया गया है । लेकिन यहां अभी तक कोई एसटी डीपो नहीं बना है। लोगों को ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। यहां अविलम्ब बस डिपो की जरुरत है।
आदिवासी समाज के लिए आरक्षित है यह सीट
गणदेवी तालुका में 70 प्रतिशत ग्रामीण इलाका है। विधानसभा के चुनाव में यह सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है। गणदेवी विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 2,89,550 है, जिसमें से 1,44,253 महिला मतदाता और 1,45,287 महिला मतदाता हैं।
इस बार इनके बीच है मुकाबला
इस बार भी भाजपा के नरेश भाई चुनाव मैदान में हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस के अशोक पटेल और आम आदमी पार्टी (आप) के पंकज एल पटेल से है। 1962 से लेकर 1985 तक कांग्रेस चार बार चुनाव जीत चुकी है, 1990 में यहां जनता दल ने जीत का झंडा गाड़ा था। 1995 से लेकर 2017 तक हर बार यहां से भाजपा को जीत मिली है। पिछले कई चुनावों ने यहां भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला होता रहा है।
इस बार किसानों की आर्थिक स्थित, महंगाई की मार, बेरोजगारी से बदहाल लोगों को आप की ओर से सुविधाओं की पेशकश लुभा रही है। लोग इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की बात कर रहे हैं। कई युवा और किसान मानते हैं कि किसी भी दल के लिए राह आसान नहीं होगी और मुकाबला जबरदस्त हो सकता है।