भरुच विधानसभा सीट पिछले कई चुनावों से भाजपा का गढ़ रही है। 1990 से ही भाजपा इस सीट से जीत रही है। आम आदमी पार्टी के आने से इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है। ये इलाका किसी जमाने में कांग्रेस के कद्दावर नेता अहमद पटेल का गढ़ रहा है। इसके बाद भी कांग्रेस को यहां 32 साल से जीत नहीं मिली है।
यहां पचास हजार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। मान्यता है की भृगु ऋषि ने भरुच की स्थापना की थी। नगर का इतिहास 8000 साल पुराना है। लगभग 143 साल पहले भरुच में नर्मदा नदी के ऊपर अंग्रेजों ने गोल्डन ब्रिज का निर्माण करवाया था। पुल के निर्माण में इतना खर्च हुआ था कि उसका नाम ही गोल्डन ब्रिज रखा गया था।
क्या हैं भरूच की परेशानियां?
- भरूच में ट्रैफिक समस्या है और शहर के रास्तों की हालत भी खराब है। यहां की झुग्गी बस्ती में रहने वाली वत्सलाबेन कहती हैं कि महंगाई के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। आज तेल के डिब्बे की कीमत डेढ़ हजार हो चुकी है। बच्चों को पढ़ाने में भी बड़ी दिक्कत आ रही है। पढ़ाई बहुत महंगी हो चुकी है।
- आशाबेन जगताप का बताती हैं कि लड़का कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करता है। 12,000 रुपये वेतन में गुजारा चलना मुश्किल हो गया है। तेल के डिब्बे की कीमत तीन हजार, गैस सिलेंडर 1100 रुपये, घर का किराया भी बढ़ता ही जा रहा है।
- शीरीन ने कहा कि जब भी इलेक्शन आता है, नेता वोट लेने आ जाते हैं। लेकिन महंगाई है कि थमने का नाम ही नहीं ले रही।
- हुसैन काठी भरुच में रहते हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में भरुच शून्य है। नेताओं की ओर से दावा किया जा रहा है कि हम लोगों ने अस्पताल बनाया है, लेकिन शहर के पश्चिम विस्तार में एक अस्पताल नहीं है। यहां बीमार होने पर लोगों को वडोदरा, सूरत या फिर अहमदाबाद ले जाना पड़ता है।
- शहजाद भरुच के मोना पार्क में रहते हैं। शहजाद कहते हैं, ‘ भरूच शिक्षा के मामले में शून्य है। यहां कोई अच्छा मेडिकल कालेज, सरकारी मेडिकल कालेज नहीं है। सरकारी स्कूलों की स्थिति भी बिल्कुल खराब है। शिक्षक भी गैरहजिर रहते हैं। भरुच जिले को विद्यार्थियों को आगे पढ़ने के लिए सूरत और वडोदरा जाना पड़ता है।’