गुजरात में भी देश के अन्य राज्यों की तरह जातिगत समीकरणों को साध करके ही गांधीनगर की गद्दी मिलती है। लेकिन इस बार भाजपा समेत तमाम राजनीतिक पार्टियों ने गांधीनगर की गद्दी तक पहुंचने का रास्ता गुजरात के उन 13 जिलों से होकर निकला है, जहां के 14 फीसदी वोटर गुजरात के चुनावों की दशा और दिशा बदलने वाले हैं। क्योंकि बीते कुछ समय से आदिवासियों के गढ़ में लगातार आंदोलन चल रहा है। ऐसे में 14 फीसदी वोटरों की अहमियत किसी भी राजनीतिक दल के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इन्हीं 14 फीसदी वोटरों को टारगेट करते हुए 'फ्लैशबैक' मोड में ले जाकर न सिर्फ अपनी बात रखी बल्कि उनको पुराने दिनों में कांग्रेस सरकार की खामिया गिनाकर 13 जिलों के वोटरों को अपने पाले में करने का पूरा खाका खींचा।
प्रधानमंत्री मोदी भी शुक्रवार को हुई रैली में इस बात का जिक्र करना नहीं भूलते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान आदिवासी इलाके के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पुरानी सरकारों ने किस तरह से इस इलाके में लाखों आदिवासियों को पानी तक की सुविधा मुहैया नहीं कराई। प्रधानमंत्री ने नवसारी जिले में तकरीबन 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों से आदिवासी बाहुल्य इलाके को जोड़ते हुए सीधा संपर्क भी बनाने की कोशिश की। गुजरात में भाजपा से जुड़े वरिष्ठ नेता हीरानंद पटेल कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी और गुजरात की भाजपा सरकार ने हमेशा से लोगों के विकास और उनकी मूलभूत सुविधाओं के लिए काम किया है। सुमित कहते हैं कि भाजपा सरकार ने इलाके के लोगों के लिए मूलभूत सुविधाओं में आने वाली सबसे बड़ी चीज पानी को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है।
गुजरात की राजनीति के जानकार उमेश रावल कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जाना न सिर्फ राजनीतिक तौर पर इस वक्त की सबसे बड़ी मांग भी है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से इस इलाके में आंदोलन चल रहा है उस लिहाज से भी भाजपा का फोकस 13 जिलों पर होना लाजिमी भी है। वह कहते हैं कि इस बार के केंद्रीय बजट में जब वित्त मंत्रालय ने तकरीबन 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पार तापी रिवर लिंक प्रोजेक्ट की घोषणा की। प्रोजेक्ट के साथ ही आदिवासियों के तकरीबन 70 से ज्यादा गांव और कई हजार एकड़ जमीन इस परियोजना में शामिल हो गई। इस पूरे आंदोलन को गुजरात कांग्रेस ने आदिवासियों के साथ मिलकर बड़ा रूप दिया।
उमेश कहते हैं कि भाजपा को इस बात का बखूबी अंदाजा है कि गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में चले आंदोलन का कहीं न कहीं आने वाले विधानसभा के चुनावों में असर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की हर गुजरात यात्रा पर आदिवासियों से जुड़े इलाकों पर पूरा फोकस बना हुआ है। मई के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा में भी आदिवासी इलाकों पर पूरा फोकस करते हुए विकास का खाका खींचा गया था। शुक्रवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी इलाकों के लिए बड़ी परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। उमेश रावल के मुताबिक भाजपा आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है तो पार्टी के लिए गांधीनगर की राह और आसान हो जाएगी।