गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की कंपनी पर लगे हेरफेर के आरोप और सेबी की ओर से 15 लाख के जुर्माने पर कांग्रेस ने उनके त्यागपत्र की मांग की है। पार्टी का कहना है कि त्यागपत्र न देने पर प्रधानमंत्री को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए।
मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और अखिलेश प्रताप सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता में इस मामले में प्रधानमंत्री की खामोशी पर सवाल उठाए। अखिलेश प्रताप ने कहा कि दुनिया जिसे भ्रष्टाचार कहती है भाजपा के लिए वो शिष्टाचार बन गया है।
गुजरात के सीएम की कंपनी को सेबी ने हेरफेर का दोषी पाया है। सेबी की ओर से लगाया गया जुर्माना जुर्म साबित करता है। बावजूद उपदेशात्मक भाषा और न खाऊंगा न खाने दूंगा की बात करने वाले पीएम फिर मौन हैं। जबकि जीरो टॉलरेंस की बात कहते हैं।
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सीएम जैसे संवैधानिक पद पर बैठे रूपाणी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात का चुनाव लड़ रही है। गुजरात की जनता ऐसे सीएम को कतई नहीं देखना चाहेगी। सुरजेवाला का कहना है कि ये पूरी तरह से आपराधिक मामला है। रूपाणी को बताना चाहिए रसिक लाल एंड संस और सारंग केमिकल्स से क्या संबंध हैं। सीएम ने दो साल तक सेबी की नोटिस पर जवाब नहीं दिया।
अखिलेश प्रताप का कहना है कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर है। इस मामले में भी अगर नहीं बोलते हैं तो एक और कड़ी जुड़ जाएगी। अभी तक अमित शाह के बेटे जय शाह, अजित डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल, वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह, रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह, प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर और आनंदी बेन पटेल के बेटे अनर पटेल के मामलों में मौन रखा है।