गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने अवैध हथियारों के कारोबार और फर्जी लाइसेंस के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। इसके तहत एटीएस ने अहमदाबाद से सात लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी उत्तर प्रदेश के एटा जिले का फर्जी निवासी बनकर नकली लाइसेंस पर अवैध हथियार ले रहे थे।
गुजरात की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने हथियार लाइसेंस से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। यह घोटाला उत्तर प्रदेश से संचालित हो रहा था। इसके तहत एटीएस ने अहमदाबाद से सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से सात अवैध हथियार, 285 कारतूस और नकली हथियार लाइसेंस बरामद किए गए हैं।
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुकेश सिंह चौहान, अभिषेक त्रिवेदी, वेदप्रकाश सिंह, राजेंद्रसिंह सांखला, अजय सेंगर, विजय सेंगर और शोलेसिंह सेंगर के रूप में हुई है। इन सभी को भारतीय न्याय संहिता और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।
अब समझिए क्या है मामला?
मामले में एटीएस के अनुसार, आरोपियों ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले का फर्जी निवासी बनकर फर्जी लाइसेंस बनवाए और देसी बंदूकें हासिल कीं। इसके लिए इन्होंने यूपी के एजेंट देवकांत पांडे को कुल 53.5 लाख रुपये दिए थे। इस पैसे के बदले में उन्हें तीन रिवॉल्वर और चार पिस्टल उपलब्ध कराई गईं।
अब समझिए जांच में क्या सामने आया?
एटीएस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक के जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने लाइसेंस में जो पता दिया है, वहां वे कभी रहे ही नहीं। किसी ने भी एटा के मजिस्ट्रेट के सामने इंटरव्यू नहीं दिया, जो लाइसेंस प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। इसके साथ ही गन हाउस रजिस्टर पर भी किसी के हस्ताक्षर नहीं मिले, यानी हथियार मिलने की प्रक्रिया भी फर्जी तरीके से की गई।
दो बिचौलिए भी हिरासत में
इसके अलावा एटीएस ने दो संदिग्ध बिचौलियों श्यामसिंह ठाकुर और हिम्मतसिंह राजपूत को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। आगे की जांच जारी है। इसके साथ ही एटीएस अब इस पूरे गिरोह के नेटवर्क और यूपी में मौजूद अन्य एजेंटों की तलाश में जुटी है।