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जैश-ए-मोहम्मद की साजिश फेल?: गुजरात और मध्य प्रदेश से आठ संदिग्ध गिरफ्तार, एटीएस ने शुरू की पूछताछ

Fri, 03 Jul 2026 03:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।

सार

गुजरात एटीएस ने आतंकी साजिश को नाकाम करने में कामयाबी हासिल की है। एटीएस ने गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आठ संदिग्धों को दबोचा है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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गुजरात एटीएस की बड़ी कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
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विस्तार
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गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आठ आरोपियों को गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार, ये सभी आरोपी गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क तैयार करने और संगठन की आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे थे।
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सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13, 17, 18, 38 और 39 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 148 और 61 के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है-
  • अहमद पुत्र अब्दुल्ला गाजीवाला
  • इब्राहिम पुत्र मोहम्मद हुसैन घाघा
  • मुदस्सिर पुत्र अब्दुल्ला गाजीवाला
  • जकारिया दुरानी पुत्र मोहम्मद अम्मार घाघा
  • मुफ्ती फौजान पुत्र इस्माइल दाऊवा
  • मोहम्मद अमीन शेरा
  • मोहम्मद अब्दुल पुत्र रहमान सावदी
  • बिलाल मोहम्मद पुत्र अम्मार घाघा

गुजरात एटीएस ने क्या कहा?
गुजरात एटीएस के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सुनील जोशी ने बताया कि हाल ही में एटीएस के डीएसपी हर्ष उपाध्याय को सूचना मिली थी कि बनासकांठा-पाटन क्षेत्र के कुछ लोग पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं। वे संगठन की विचारधारा का प्रचार कर रहे थे और गुजरात में उसका सक्रिय नेटवर्क बनाने के लिए एक छोटा समूह तैयार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस सूचना के आधार पर एक टीम बनाई गई। टीम ने जानकारी की पुष्टि की और आगे की जांच के बाद इन गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर ली।

डीआईजी ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए बनासकांठा, नवसारी और पाटन जिले की पुलिस तथा विशेष अभियान समूह (एसओजी) की मदद से अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इसके बाद सभी आरोपियों को विभिन्न स्थानों से हिरासत में लिया गया।

डीआईजी ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में जैश-ए-मोहम्मद से उनके संबंध के सबूत मिले। उन्होंने संगठन के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए मसूद अजहर के नाम से पत्र भी लिखे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने मसूद अजहर की लिखी कट्टरपंथी किताबों और अन्य सामग्री का गुजराती भाषा में अनुवाद किया, ताकि उसे गुजरात में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सके।

जांच में कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन से आर्थिक संबंध भी सामने आए। डीआईजी ने बताया कि आरोपियों को जैश-ए-मोहम्मद की ओर से तीन लाख रुपये दिए गए थे। उन्हें एक चार पहिया वाहन खरीदने और किराये पर एक छोटा सुरक्षित ठिकाना लेने का काम सौंपा गया था।
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उन्होंने कहा कि जांच में पाकिस्तान में मौजूद अब्दुल्ला नाम के एक व्यक्ति की पहचान से जुड़े दूरसंचार संबंधी विवरण भी मिले हैं, जो इन आरोपियों के संपर्क में था। हालांकि, आरोपियों के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।
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