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गुजरात: पहले चरण की 70 फीसदी सीटों पर बीजेपी का कब्जा, एकमात्र यहां कांग्रेस का वर्चस्व

Thu, 07 Dec 2017 04:26 PM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण में जिन 89 सीटों पर शनिवार को मतदान होना है, भाजपा ने 2012 में उनमें से 63 सीटें (70 फीसदी) जीती थीं। कांग्रेस को उनमें से 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि एक-एक सीट पर एनसीपी और जदयू को और दो सीटों पर गुजरात परिवर्तन पार्टी को कामयाबी हासिल हुई थी।
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इस चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के नेता हार्दिक पटेल भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे। इसकी वजह यह है कि कच्छ, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के जिन इलाकों में पहले चरण का मतदान होना है वहां कई सीटों पर पाटीदारों की अच्छी-खासी संख्या है।

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वैसे पूरे प्रदेश की छह करोड़ की आबादी में पाटीदार 12 फीसदी हैं, लेकिन 16 सीटों वाले सूरत जिले में उनकी संख्या सबसे ज्यादा है। डायमंड सिटी के नाम से मशहूर इस जिले की वराछा रोड, कमरेज, कटरगाम, करंज, ओलपाड़ और उधना में वे किसी भी उम्मीदवार की किस्मत बदलने की हैसियत रखते हैं।
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इनमें से वराछा रोड सीट पर तो पाटीदारों की संख्या 70 फीसदी से ज्यादा है। यहां के 1.98 लाख वोटरों में से डेढ़ लाख पाटीदार मतदाता हैं। इससे अलावा सूरत-उत्तर और मजुरा सीट पर भी पाटीदार वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पिछले चुनाव में भाजपा को सूरत की 16 में से 15 सीटें हासिल हुई थीं, लेकिन पिछले दो साल से चल रहे पाटीदार आंदोलन के कारण समीकरण बदले हुए हैं।

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सूरत के अलावा जूनागढ़ की विसावदर और मानवदर सीटों पर भी पाटीदार जीत-हार में अहम भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। इनमें से विसावदर सीट पर पर 2012 में केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी ने जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में उनकी इस पार्टी का भाजपा में विलय हो गया।
 
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राजकोट पश्चिम पर सबकी निगाहें

गुजरात चुनाव - फोटो : social media
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इसे राज्य की सबसे हाई प्रोफाइल सीट माना जा रहा है क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री विजय रूपाणी चुनाव मैदान में हैं। यहां से वजुभाई वाला 1985 से 2012 तक सात बार विधायक रहे हैं। इसलिए इसे भाजपा का गढ़ कहा जा सकता है। वाला के कर्नाटक का गवर्नर बनने के बाद 2014 के उपचुनाव में रूपाणी यहां से जीते थे। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने इंद्रनील राज्यगुरु को मैदान में उतारा है जो राजकोट-पूर्व से मौजूदा विधायक हैं। यहां के 3.15 लाख वोटरों में से 62 हजार पाटीदार हैं, जो भाजपा से नाराज हैं। इसके अलावा व्यापारी वर्ग भी नोटबंदी और जीएसटी के कारण खुश नहीं है।

पहले चरण में 198 करोड़पति
इस चरण में किस्मत आजमा रहे 977 उम्मीदवारों में से 923 के हलफनामे के विश्लेषण से पता चला है कि उनमें से 198 करोड़पति हैं। सबसे ज्यादा 76 करोड़पति भाजपा से हैं। उसके बाद 60 करोड़पतियों के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर पर है। इसके अलावा 25 निर्दलीय उम्मीदवार भी करोड़पति हैं।  

एक नाम की दो-दो सीटें
पहले चरण में भावनगर की महुवा सीट और जूनागढ़ की मंगरोल सीट के नाम से सूरत में भी दो विधानसभा क्षेत्र हैं। हालांकि सूरत की मंगरोल और महुवा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 

सबसे ज्यादा उम्मीदवार जामनगर ग्रामीण सीट पर
जामनगर ग्रामीण सीट पर सबसे ज्यादा 27 उम्मीदवार हैं जबकि सबसे कम तीन-तीन उम्मीदवार भरूच जिले की झगाड़िया और नवसारी जिले की गणदेवी सीट पर हैं।

सूरत में सबसे बड़ा और छोटा विधानसभा क्षेत्र
सूरत जिले की कमरेज सीट पर मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा (4.30 लाख) है, जबकि सबसे कम मतदाता सूरत-उत्तर (1.57 लाख) में हैं।

लगभग आधे वोटर 18-40 वर्ष के
इस चरण में कुल मतदाताओं की संख्या दो करोड़ 12 लाख से ज्यादा है। इनमें से 18-40 वर्ष के वोटरों की संख्या एक करोड़ 13 लाख से ज्यादा है।

वोटों में 9 फीसदी का अंतर
सत्ताधारी भाजपा और उसे चुनौती दे रही कांग्रेस के बीच 9 फीसदी वोटों का अंतर है। भाजपा को 1995 से अब तक लगभग 48 फीसदी वोट मिलता रहा है जबकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत 39 फीसदी रहा है।
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