तीन मार्च 2002 के बाद उनकी आंखों से सुकून गायब हो चुका है। डर पीछा नहीं छोड़ता और मायूसी जैसे उसका नसीब बन चुकी है। अपनी नजर के सामने परिवार के 14 लोगों की हत्या होते देखना, जिसमें खुद की बच्ची भी शामिल हो, सामूहिक बलात्कार का शिकार बनकर अधमरी हालात में कई घंटों तक पड़े रहना और फिर होश आने पर बड़ी मुश्किल से पास की पहाड़ी पर छिपकर अपनी जान बचाना।
जब यह सब हुआ उस समय बिलकिस बानो की उम्र करीब बीस साल होगी। गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों को आज बारह साल बीत चुके हैं। पिछले दिनों बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 12 आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद बिलकिस बानो खुश है। उसने कहा, "बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले ने बलात्कारियों और हत्यारों के लिए सजा को बरकरार रखा है, मुझे न्याय मिला है। उसने कहा कि हमें बदला नहीं चाहिए, बल्कि सुकून भरी जिंदगी चाहती हूं।"
उसने बताया कि वो हमेशा "न्यायपालिका में पूर्ण विश्वास है। यह अच्छा निर्णय है और मैं बहुत खुश हूं। बता दें कि हमले के दौरान अहमदाबाद के रंधिकपुर में रहनेवाली बिलकिस बानो के परिवार में 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिलकिस बानो उस समय मात्र 19 साल की थी, और 5 माह की गर्भवती थी। उनके साथ गैंगरेप किया गया था।