साल 2002 में गोधरा में ट्रेन जलाने वाले दो आरोपियों को विशेष एसआईटी अदालत ने सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साबरमती एक्सप्रेस की दो बोगियों के जलाए जाने के कारण 59 कारसेवक मारे गए थे। इस मामले में तीन अन्य आरोपी बरी हो गए हैं।
विशेष न्यायाधीश एचसी वोरा फारूक भाना और इमरान शेरू को दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी। इससे पहले सरकारी वकीलों ने 2002 के साबरमती एक्सप्रेस की दो बोगियों को जलाए जाने के मामले में उनकी भूमिका साबित की। हालांकि अदालत ने हुसैन सुलेमान मोहन, कसम भामेड़ी और फारूक धंतिया को बरी कर दिया।
इन पांचों आरोपियों को 2015-16 में गिरफ्तार किया गया था और इस मामले की सुनवाई साबरमती केंद्रीय कारागार में स्थापित एक विशेष अदालत में की गई। मोहन को मध्य प्रदेश के झाबुआ, भामेड़ी को गुजरात के दाहोद रेलवे स्टेशन, धांतिया और भाना को गोधरा में उनके घर से और भटूक को महाराष्ट्र के मालेगांव से दबोचा गया था। इस मामले के आठ अन्य आरोपी अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं।
इससे पहले एसआईटी की विशेष अदालत ने 1 मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था, जबकि 63 को बरी कर दिया था। इनमें 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि 20 को उम्रकैद की सजा हुई। बाद में हाईकोर्ट में कई अपील दायर कर दोषसिद्ध को चुनौती दी गई, जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी।