गुजरात के सुरेंद्रनगर की एक अदालत ने 2021 में वांछित आरोपी हनीफ खान और उसके नाबालिग बेटे की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत के मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी है। अदालत ने सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज करने का आदेश देते हुए उन्हें 8 अगस्त को पेश होने के लिए समन जारी किया है। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों से पुलिस के आत्मरक्षा में गोली चलाने के दावे का समर्थन नहीं होता।
गुजरात के सुरेंद्रनगर की एक अदालत ने वांछित अपराधी हनीफ खान मलिक और उसके नाबालिग बेटे की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत के मामले में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी। अदालत ने सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या व आपराधिक साजिश का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) केपी शर्मा की अदालत ने 18 जुलाई को यह आदेश दिया। साथ ही सभी पुलिसकर्मियों को समन जारी कर 8 अगस्त को अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस टीम ने 6 नवंबर 2021 को दसादा तालुका के गेडिया गांव में हनीफ खान और उसके नाबालिग बेटे को गोली मार दी थी। पुलिस ने किया दावा था कि गिरफ्तारी के दौरान भीड़ ने हमला किया था और आत्मरक्षा में उसे गोली चलानी पड़ी। हनीफ खान की पत्नी सोहनाबेन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें उनके पति और नाबालिग बेटे की मौत हो गई।
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एसआईटी ने दाखिल की थी सी-समरी रिपोर्ट
मई 2025 में अदालत के आदेश पर सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई। एसआईटी ने दो महीने बाद अदालत में सी-समरी रिपोर्ट दाखिल की। ऐसी रिपोर्ट तब दी जाती है, जब जांच एजेंसी यह निष्कर्ष निकाले कि मामला न पूरी तरह सही है और न ही पूरी तरह गलत। सोहनाबेन ने इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कहा कि यह आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने की कोशिश है।
फोरेंसिक रिपोर्ट में पुलिस के दावों की खुली पोल
याचिकाकर्ता के वकील पुनीत दवे ने बताया कि अदालत के सामने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फोरेंसिक (एफएसएल) रिपोर्ट पेश की गई। अदालत ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर तत्कालीन पुलिस सब-इंस्पेक्टर वीएन जडेजा समेत सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और धारा 114 (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया। वकील ने कहा कि गवाहों के बयान और एफएसएल रिपोर्ट से पुलिस के आत्मरक्षा में गोली चलाने के दावे का कोई स्पष्ट समर्थन नहीं मिलता।