सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए चल रही आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को सरकार अक्तूबर से आगे नहीं बढ़ाएगी। योजना के तहत एमएसएमई को 100 फीसदी गारंटी वाला तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटने का लक्ष्य है।
सूत्रों का कहना है कि अभी तक योजना के तहत 65 फीसदी राशि का कर्ज ही मंजूर किया गया है। बावजूद इसके योजना की अवधि 31 अक्तूबर के बाद बढ़ाए जाने की संभावना कम है। योजना का मकसद कोविड-19 महामारी में आर्थिक संकट से जूझ रहे छोटे-मझोले उद्योगों को आसान ऋण उपलब्ध कराना था।
इसमें सरकार उद्यमों के कर्ज की पूरी गारंटी ले रही है और एक साल तक ब्याज भुगतान से छूट भी दिला रही है। इतना ही नहीं बैंकों की ओर से नौ फीसदी की तय दर से सब्सिडी वाला कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि एमएसएमई कर्ज का औसत ब्याज 13-14 फीसदी होता है।
पेशेवरों को भी मिल रहा योजना का लाभ
सरकार ने एक अगस्त को योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें चिकित्सकों, अधिवक्ताओं और सीए को भी कारोबारी उद्देश्य के लिए कर्ज मुहैया कराने की छूट दी थी। इसके अलावा कंपनियों पर 29 फरवरी तक कर्ज की ऊपरी सीमा भी 25 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ कर दिया था। यानी जिन कंपनियों पर फरवरी तक 50 करोड़ तक का कर्ज बकाया है, वे गारंटी वाला कर्ज ले सकती हैं। पांच अक्तूबर, 2020 तक योजना के तहत कुल 1.87 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर किया गया है।