राज्य सभा ने जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर बिल के लिए लाए गए संविधान संशोधन बिल को पास कर दिया है। विधेयक पारित होने के बाद राजनीतिक दलों से जुड़े नेता और दूसरे लोग सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इनमें से कुछ प्रतिक्रियाएं बेहद दिलचस्प हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने बिल पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है।
पात्रा ने ट्वीट किया है,'1947 से सभी आर्थिक सुधारों की मां जीएसटी बिल के कामयाबी से पास होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को बधाई।'
पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर ने बिल का समर्थन करने वाले सांसदों को बधाई दी है।
तेंदुलकर ने ट्विटर पर लिखा है,'जीएसटी बिल के लिए साथ आने वाले सभी लोगों को शुभकामना। बेहतर कर व्यवस्था का स्वागत होना चाहिए। जीएसटी के भारत के लिए नतीजे देने को लेकर आशान्वित हैं।'
तेंदुलकर ने बिल पर चर्चा के पहले भी इसके समर्थन में ट्वीट किया था।
कांग्रेस कहती रही है कि जीएसटी मूलरूप से यूपीए सरकार का बिल है
नरेंद्र मोदी
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विपक्षी पार्टी कांग्रेस कहती रही है कि जीएसटी मूलरूप से यूपीए सरकार का बिल है, इसे लेकर सुधींद्र कुलकर्णी ने ट्विटर पर लिखा है,'उम्मीद है कि जीएसटी आखिरी उदाहरण होगा कि पार्टियां सत्ता में रहते हुए एक बिल का समर्थन करती हैं और विपक्ष में होने पर उसका विरोध करती हैं।'
वहीं, जयंत के मोहापात्रा ने ट्वीट किया है,'1991-92 के आर्थिक सुधारों के बाद जीएसटी सबसे अहम आर्थिक सुधार होने जा रहे हैं। ये लंबी अवधि में लोगों और देश के लिए लाभकारी होगा।' कई लोगों ने जीएसटी बिल को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर चुटकी भी ली है।
भावेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते जीएसटी को लेकर दिए बयान को याद दिलाया है। उन्होंने ट्वीट किया है,'जीएसटी कभी सफल नहीं हो सकता- गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री मोदी।'
उन्होंने आगे लिया है,'आधिकारिक तौर पर सबसे बड़ा यू टर्न।'
इसके जवाब में सत्य साधक नरेंद्र नाम के ट्विटर यूजर ने अकाउंट से किए ट्वीट में लिखा है,'भाई वही तो जिसको मारा ठोकर साल आठ। आज सर पे बिठा देते ठाठ।'
डा। गणेश पोटे ने जीएसटी बिल को लेकर चुटकी ली है। उन्होंने लिखा है,'हिंदूपुर की नई अप्रत्यक्ष टैक्स एकेडमी को नया नाम दिया जा सकता है अटल बिहारी वाजपेयी नेशनल एकेडमी ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स।'
निलेश संगोये ने लिखा है,'रेस्ट इन पीस रेशनलिटी (तर्कशक्ति) जीएसटी के बारे में बामुश्किल कोई जानकारी रखने वाले लोग इसका जश्न मना रहे हैं क्योंकि पूरी दुनिया ऐसा कर रही है।'
अजय शर्मा ने लिखा है,'आर्थिक नीतियों के मामले में अब सारे दल एक जैसे हैं यह एकता नहीं है हमारी दरिद्रता है। एक भी दल जीएसटी के विरोध में कोई ठोस तर्क नहीं रख पाया।'