प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जीएसटी जुआ से कम नहीं है, क्योंकि अगर जीएसटी कामयाब नहीं हुई तो सरकार के साथ-साथ मोदी की किरकिरी होना तय है। 2019 लोकसभा चुनाव होने में 20 महीने का वक्त है और ऐसे में इस तरह के फैसले एक दांव की तरह माना जा रहा है।मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा जुआ खेला है। कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों की लाख विरोध के बावजूद सरकार ने आधी रात को लागू करने के फैसले पर अडिग रही है।
वैसे भी, विपक्ष नोटबंदी के फैसले को लेकर सरकार पर ऊंगली उठ चुकी है।हालांकि, सरकार नोटबंदी को आज भी सफल करार देती है। नोटबंदी जिस तरीके से प्रधानमंत्री के फैसले माना जा रहा है, उसी तरह जीएसटी भी उन्हीं के फैसले मानी जा रही है। ऐसे में अगर कामयाबी या असफलता, दोनों का ही सेहरा उनके सिर ही बंधेगा।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार ने सीनियर नौकरशाहों को एक बैठक के दौरान साफ-साफ निर्देश दिया था कि जीएसटी को कामयाब बनाने के लिए हर कोशिश करें। पीएम ने कहा कि वे अपने संबंधि विभागों पर जीएसटी से पड़ने वाले असर का बारीकी से मुआयना करें। मोदी अफसरों से यह जिक्र करना नहीं भूले कि उन्होंने नोटबंदी के मुद्दे को को किस तरह 'अपने कंधों पर' ढोया है।