जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को एक 7 सदस्यीय मंत्री समूह (जीओएम) के गठन का निर्णय लिया, जो आपदा प्रभावित केरल जैसे राज्यों में राहत संसाधन जुटाने के लिए एक नया उपकर लगाने के प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद रिपोर्ट देगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाला ये जीओएम नए अप्रत्यक्ष कर सिस्टम में अधिकतर राज्यों में कर वसूली में आई गिरावट को भी देखेगा।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 30वीं बैठक में बिहार, ओडिशा व गुजरात जैसे कुछ राज्य केरल के प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं से सहमत नहीं थे। बैठक के बाद जेटली ने बताया कि बाढ़ से तबाह हुए केरल की तरफ से राज्य में जीएसटी पर 10 फीसदी आपदा प्रबंधन उपकर लगाने के प्रस्ताव पर परिषद ने चर्चा के लिए 7 सदस्यों का जीओएम बनाया है। इस 7 सदस्यीय समिति में पूर्वोत्तर, पहाड़ी और तटीय राज्यों के सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान जल्द कर दिया जाएगा।
पांच बिंदु जांचेगा जीओएम
- उपकर का दायरा राज्य में ही होगा या इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा
- क्या इसे सिर्फ कुछ लक्जरी सामानों पर ही लगाया जाना चाहिए
- क्या एनडीआरएफ या एसडीआरएफ का सिस्टम इन आपदाओं से खुद निपटने में सक्षम है
- किन परिस्थितियों में आपदा प्रबंधन उपकर लगाए जाने का निर्णय लिया जा सकता है
- जीएसटी के दायरे में इस तरह के उपकर को लगाए जाने की वैधानिक स्थिति पर विचार
उपकर लगाने में ये भी परेशानी
आपदा उपकर लगाने के लिए जीएसटी के सॉफ्टवेयर में थोड़ा बदलाव करना होगा। यह प्रस्तावित शुगर उपकर जैसा हो सकता है, जिस पर मई में परिषद की बैठक में चर्चा हुई थी। हालांकि, पिछली बैठक में शुगर उपकर का विरोध भी हुआ था। बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकारों के पास अपने स्तर से कर लगाने का अधिकार नहीं रहा है, लेकिन राज्यों की मदद के लिए जीएसटी अधिनियम में उपकर लगाने का प्रावधान है।