सार
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने सोमवार को भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट्स (एएसडब्ल्यू) की श्रृंखला के अंतिम युद्धपोत ‘अजय’ का सफलतापूर्वक जलावतरण किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर चीफ ऑफ मटेरियल, भारतीय नौसेना वाइस एडमिरल किरण देशमुख की पत्नी श्रीमती प्रिया देशमुख ने जलावतरण
की रस्म पूरी की।
जीआरएसई ने नौसेना के लिए शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अजय’ किया लॉन्च
- फोटो : अमर उजाला
समुद्र में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए भारतीय नौसेना लगातार अपनी ताकत में और इजाफा कर रही है। इसी बीच रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने सोमवार को भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्लयू) शैलो वॉटर क्राफ्ट्स में से आखिरी जहाज 'अजय' को लॉन्च किया। यह जहाज कोलकाता में नौसेना के चीफ ऑफ मटेरियल वाइस एडमिरल किरण देशमुख की पत्नी प्रिया देशमुख ने लॉन्च किया।
बता दें कि जहाज 'अजय' के लॉन्च के साथ ही इस परियोजना के सभी आठ शिप्स का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर वाइस एडमिरल देशमुख मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
क्या बोले एडमिरल किरण देशमुख
इस मौके पर वाइस एडमिरल किरण देशमुख ने कहा, जीआरएसई ने पिछले वर्षों में जबरदस्त प्रगति की है और यह देश की प्रमुख रक्षा शिपयार्ड बन चुका है। आईएनएस अर्नाला का हालिया कमीशन और दूसरे पोत की तैयारी, नौसेना और जीआरएसई की मजबूत साझेदारी को दर्शाती है। जीआरएसई वह भारतीय शिपयार्ड है जिसने सबसे अधिक युद्धपोत डिज़ाइन और बनाए हैं। वहीं, कमोडोर पीआर हरि ने कहा कि वर्तमान में हमारे पास 16 युद्धपोत निर्माणाधीन हैं और भविष्य में कई नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। मैं आश्वस्त हूं कि जीआरएसई अगले दशक में भारतीय नौसेना को 100 युद्धपोत सौंपने में सक्षम होगा।
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समुद्री ऑपरेशनों के लिए बहुउपयोगी जहाज
जहाज के लॉन्चिंग पर जीआरएसई के एक अधिकारी ने बताया कि इन आठ जहाजों को खासतौर पर तटीय इलाकों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज छोटे पानी के इलाकों (शैलो वॉटर) में भी आसानी से ऑपरेशन कर सकते हैं। इनकी लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर है। ये पोत तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
निगरानी ही नहीं दुश्मन जहाज पर हमला करने में भी सक्षम
अधिकारी ने बताया कि इन जहाजों में हल्के टॉरपीडो, एएसडब्ल्यू (एएसडब्लयू) रॉकेट और माइन्स जैसे घातक हथियार लगे हैं। इसके अलावा ये विमान के साथ मिलकर समन्वित एंटी-सबमरीन ऑपरेशन भी कर सकते हैं। ये जहाज सिर्फ निगरानी नहीं, बल्कि सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों पर हमला करने की भी क्षमता रखते हैं। साथ ही ये कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशनों और माइंस बिछाने के कार्यों में भी उपयोगी हैं।
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स्वदेशी निर्माण का बड़ा उदाहरण
गौरतलब है कि जीआरएसई की तरफ से पूरी तरह भारत में डिजाइन और तैयार किए गए इन युद्धपोतों की यह श्रृंखला भारतीय नौसेना की ताकत को तटीय क्षेत्रों में काफी बढ़ा देगी।