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British Jet F-35B: ब्रिटिश लड़ाकू विमान एफ-35बी ने कोच्चि से भरी वापसी के लिए उड़ान, एक महीने के बाद रवाना हुआ

Tue, 22 Jul 2025 11:18 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि

सार

ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B लाइटनिंग लड़ाकू विमान ब्रिटेन के सबसे उन्नत स्टील्थ बेड़े का हिस्सा है। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक और 11 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कीमत वाला यह विमान तकनीकी खराबी आने के बाद 14 जून से यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा था।
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F-35B - फोटो : PTI
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विस्तार
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ब्रिटिश लड़ाकू विमान F-35B रखरखाव और मरम्मत पूरा करने के बाद मंगलवार को वापस लौट गया। लड़ाकू विमान F-35B एक महीने से भी ज्यादा समय पहले तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा था। इसकी आपात लैंडिंग हुई थी। तब से यह वहीं खड़ा था। 

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ऑस्ट्रेलिया के डार्विन के लिए रवाना
सूत्रों के मुताबिक, सुबह 10.50 बजे उड़ान भरने वाला यह विमान ऑस्ट्रेलिया के डार्विन के लिए रवाना हुआ। इससे पहले सोमवार को विमान को हैंगर से बाहर निकालकर हवाई अड्डे के बे में रखा गया था। 

ब्रिटिश उच्चायोग ने जारी किया बयान
मामले में ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने कहा, '14 जून को आपातकालीन लैंडिंग की वजह से तिरुवनंतपुरम में उतरा ब्रिटिश एफ-35बी विमान आज तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रवाना हुआ। 6 जुलाई से तैनात ब्रिटिश इंजीनियरिंग टीम ने मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी कर ली है, जिससे विमान को फिर से सक्रिय सेवा प्रदान करने की अनुमति मिल गई है। मरम्मत और जरूरी प्रक्रिया के दौरान भारतीय अधिकारियों और हवाई अड्डे की टीमों के समर्थन और सहयोग के लिए ब्रिटेन बहुत आभारी है। हम भारत के साथ अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।'
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सबसे उन्नत स्टील्थ बेड़े का हिस्सा
ब्रिटिश रॉयल नेवी का F-35B लाइटनिंग लड़ाकू विमान ब्रिटेन के सबसे उन्नत स्टील्थ बेड़े का हिस्सा है। दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक और 11 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कीमत वाला यह विमान तकनीकी खराबी आने के बाद 14 जून से यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़ा था।

पूरा मामला समझिए
विमान ने 14 जून को एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स से उड़ान भरी थी। खराब मौसम के कारण वापस अपने वाहक पोत पर नहीं लौट सका था। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इसे तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया गया था। इसके बाद विमान में जमीन पर रहते हुए एक इंजीनियरिंग समस्या आ गई, जिसके कारण इसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में वापस लौटने में अस्थायी रूप से देरी हुई। एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स के इंजीनियरों ने विमान की जांच की और पाया कि ब्रिटेन स्थित एक इंजीनियरिंग टीम ही इसे ठीक कर सकती है। ब्रिटेन ने विमान को रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा में ले जाने के भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

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