सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में जमीनी हालात को ध्यान में रखना जरूरी है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा, आप पहलगाम में हुई घटना को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वहां की स्थिति कुछ अलग है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के बाद वादा किया गया था कि विधानसभा चुनाव होंगे और चुनाव कराए भी गए। उन्होंने यह भी कहा, यह समय नहीं है कि याचिकाकर्ता माहौल को और उलझाएं। मेहता ने इस मामले पर सरकार से निर्देश लेने के लिए आठ हफ्तों का समय मांगा।
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सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द दोबारा राज्य का दर्जा दिया जाए। इन याचिकाओं में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने पहले आश्वासन दिया था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, इसलिए अब जरूरी है कि कोर्ट समयबद्ध तरीके से यह निर्देश दे कि जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाया जाए।
ये याचिकाएं शिक्षक जहूर अहमद भट और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक की ओर से दायर की गई थीं। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने पहले कहा था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलेगा, लेकिन अनुच्छेद 370 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई साल बीत जाने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। यह याचिका वकील शोएब कुरैशी के जरिए उस मामले में दायर की गई थी, जिसमें अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला लिया गया था और जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सही माना था।
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याचिका में कहा गया, याचिकाकर्ता जम्मू-कश्मीर के जागरूक नागरिक हैं और यह देखकर आहत हैं कि 11 अगस्त 2023 के आदेश के 10 महीने बीत जाने के बाद भी राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। इससे जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और भारत के संघीय ढांचे का भी उल्लंघन हो रहा है। इसलिए इस याचिका के माध्यम से केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश देने की मांग की गई है।