डीजी सैनिक सम्मेलन में अपनी बात रखता जवान
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महानिदेशक से लिटिगेशन कम से कम करने की अपील
उक्त अधिकारी ने दूसरा मुद्दा यह उठाया कि महानिदेशालय स्तर पर भारत सरकार के आदेशों को सकारात्मक विश्लेषण करने की आवश्यकता है। भारत सरकार के आदेशों का गलत विश्लेषण कर अधिकारियों एवं जवानों को जायज लाभ से वंचित रखा जाता है। इसके पश्चात कार्मिक अपना प्रतिवेदन महानिदेशालय स्तर पर भेजता है, जिसे मना कर दिया जाता है। कार्मिक, हाइकोर्ट से लाभ प्राप्त करने का आदेश लाता है, जिसे अपने ही विभाग द्वारा उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाती है। इसके चलते बल के साथ साथ अधिकारी की ऊर्जा का भी क्षय होता है। बल में एक नकारात्मक माहौल बनता है। ऐसे में महानिदेशक से अनुरोध है कि इस मामले में विशेष पहल कर लिटिगेशन को कम से कम करने का प्रयास किया जाए। इस मामले में सबसे बड़ी जिम्मेदारी महानिदेशालय की ही है।
डीजी सैनिक सम्मेलन में मौजूद जवान
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आईजी मितेश जैन को रिपोर्ट प्रेषित करने के निर्देश
सहायक कमांडेंट, दर्शन यादव (43 बैच) 23 बटालियन ने कहा, मैं 2010 बैच का अधिकारी हूं। 13 साल से बिना प्रमोशन के एक ही रैंक पर हूं। विडंबना यह है कि मुझसे 9 बैच सीनियर कमांडेंट और 12 बैच जूनियर एसी हैं। यादव ने डीजी से इस विषय पर ध्यान देने का अनुरोध किया। पूर्व डीजी के आदेश पर कमांडेंट 48 बटालियन वीएसआर कृष्णा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। उसने अपनी रिपोर्ट 10/06/2024 को महानिदेशक को सौंपी थी, लेकिन 8 महीने बाद भी उस कमेटी की सिफारिश पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उन्होंने डीजी से अनुरोध किया है कि उक्त रिपोर्ट पर संज्ञान लिया जाए। सैनिक सम्मेलन के बाद डीजी ने इन दोनों अधिकारियों को बुलाकर उनके मुद्दे को विस्तार से जानने का प्रयास किया। डीजी ने कश्मीर परिचालनिक सेक्टर के आईजी मितेश जैन को निर्देशित किया कि गौरव सिंह को अपने कार्यालय में बुलाकर उक्त बिंदुओं पर चर्चा कर एक रिपोर्ट प्रेषित करें। डीजी जीपी सिंह ने दर्शन यादव के स्टेगनेशन कमेटी वाले मुद्दे पर महानिदेशालय में पहुंचने पर रिपोर्ट प्रेषित करने का निर्देश दिया है।
डीजी सैनिक सम्मेलन के दौरान राशन की गुणवत्ता जांचते अधिकारी
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सीआरपीएफ को फूड बिल से रखा जा रहा वंचित: दीपेंद्र राजपूत
दीपेंद्र राजपूत, (36 बैच), द्वितीय कमान अधिकारी द्वारा बताया गया कि चुनावी ड्यूटी में अन्य सीएपीएफ फूड बिल ले रही हैं। दूसरी तरफ सीआरपीएफ को इससे वंचित किया जा रहा है। इस बाबत मैं पिछले चार वर्षों से लड़ रहा हूं। एनएफएसजी (स्केल 13) में सीनियर ड्यूटी पोस्ट की गलत कैलकुलेशन के संबंध में दिल्ली हाइकोर्ट का सकारात्मक निर्णय आने के बाद महानिदेशालय, आदेश को पहले लागू कर रहा था, लेकिन अब ऐसा सुनने में आ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाने वाली है। इस मुद्दे पर सकारात्मक कार्रवाई की जाए। विनोद त्रिवेदी, द्वितीय कमान अधिकारी ने डीजी को अवगत कराया कि एसएसबी में मेरे बैचमेट को 2019 से एनएफएसजी (स्केल 13) मिल रहा है, लेकिन सीआरपीएफ द्वारा सीनियर ड्यूटी पोस्ट की गलत कैलकुलेशन करने से आज हमें 2025 में भी एनएफएसजी मिलने की उम्मीद नहीं है। डीजी ने उक्त सभी मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
हेलमेट की गुणवत्ता जांचते अधिकारी
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भत्तों में विसंगतियों का मुद्दा उठाया
शशिभूषण सिंह, सहायक कमांडेंट (45th बैच) आरटीसी श्रीनगर द्वारा सैनिक सम्मेलन में जवानों और अधिकारियों को मिलने वाले भत्तों में विसंगतियों के संबंध में डीजी को अवगत कराया गया। इस मामले में डीजी ने कहा, आपके साथी गौरव सिंह द्वारा यह मुद्दा कल उठाया जा चुका है। हम इस पर कार्रवाई करेंगे। तत्पश्चात शशिभूषण सिंह द्वारा कैडर रिव्यू जल्द से जल्द करने का अनुरोध किया गया। वजह, कैडर रिव्यू का मामला अब एसएलपी से अलग हो चुका है। समय से पदोन्नति न होने पर स्वयं के साथ परिवार को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। प्रमोशन न मिलने से हमारे मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी आंच आती है। अधिकारी द्वारा यह भी बताया गया कि नई 35 बटालियन खड़ी करने के मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए, क्योंकि सभी रैंक में फौज बूढ़ी हो रही है।