भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि इस समय धरती की टेक्टोनिक प्लेटें खिसक रही हैं, जिसकी वजह से इतने भूकंप आ रहे हैं। देश के बड़े इलाकों में ये महसूस किए गए। लोग डरे भी। कुछ जगहों पर हल्का-फुल्का नुकसान भी देखने को मिला, लेकिन अच्छी बात ये रही कि किसी के मरने या घायल होने की खबर नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार दो टेक्टोनिक प्लेटों की बीच में बनी गैस या प्रेशर जब रिलीज होता है, तब भी हमें भूकंप के झटके महसूस होते हैं। ये हालात गर्मियों में ज्यादा देखने को मिलते हैं।
भूकंप स्टेशन बताएंगे धरती की हलचल
डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि नेशनल सीस्मोलॉजिकल नेटवर्क साल 2021-22 में 35 फील्ड स्टेशन लगाने जा रहा है। इसके साथ ही देश में कुल 150 भूकंप स्टेशन हो जाएंगे, जो धरती की हलचलों के बारे में सूचना देंगे।
डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि देश को चार भूकंप जोन में बांटा गया है। जोन-5 यानी सबसे ज्यादा भूकंपीय गतिविधियों वाला स्थान। इसमें कश्मीर घाटी का हिस्सा, हिमाचल प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा, उत्तराखंड का पूर्वी हिस्सा, गुजरात का कच्छ, उत्तरी बिहार, सभी उत्तर-पूर्वी राज्य और अंडमान-निकोबार आते हैं। वहीं जोन-4 में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्सा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्से, दिल्ली, सिक्किम, यूपी का उत्तरी हिस्सा, बिहार और पश्चिम बंगाल का कुछ हिस्सा, गुजरात और महाराष्ट्र का पश्चिमी हिस्सा और राजस्थान का सीमाई इलाका आता है।
जोन-3 में केरल, लक्षद्वीप, उत्तर प्रदेश का निचला इलाका, गुजरात-पंजाब के कुछ हिस्से, पश्चिम बंगाल का हिस्सा, मध्यप्रदेश, उत्तरी झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक आदि आते हैं। जबकि जोन-2 यानी सबसे कम भूकंपीय गतिविधि वाला जोन है। इसमें कई राज्यों के कुछ छोटे-छोटे हिस्से आते हैं।