कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में आदिवासी समुदायों के अधिकारों के घोर उल्लंघन का मुद्दा उठाया और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की।
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अप्रैल, 2023 के नियमगिरि फैसले में कहा था कि एफआरए, 2006 के तहत ऐसी सहमति अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए 13,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के डायवर्जन के संबंध में, जिसमें निकोबारी और शोम्पेन बस्तियों की पारंपरिक, पैतृक भूमि शामिल है। द्वीप प्रशासन ने 12 अगस्त, 2022 को कैंपबेल बे, लक्ष्मी नगर और गोविंद नगर में बस्ती समुदायों की ग्राम सभाओं के आयोजन की बात स्वीकार की है।
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यह दावा मानवाधिकार अधिनियम का उल्लंघन
उन्होंने लिखा, 'यह दावा मानवाधिकार अधिनियम, 2006 का उल्लंघन है। कोई भी एक व्यक्ति मानवाधिकार अधिनियम, 2006 में दिए गए अधिकारों के हकदार पूरे समुदाय की ओर से सहमति नहीं दे सकता। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अध्यक्ष ने स्वयं 22 नवंबर, 2022 को आपके कार्यालय सहित विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखकर एनओसी वापस ले ली थी। हालांकि, इस गैर-कानूनी एनओसी को अभी भी निकोबारी लोगों की सहमति के रूप में उद्धृत किया जा रहा है।