भारत के सुदूर दक्षिण में स्थित ग्रेट निकोबार द्वीप के शोमपेन हट में बने पोलिंग बूथ में एक भी वोट नहीं पड़ा। यहां अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की लोकसभा सीट पर मतदान के लिए 11 अप्रैल को पोलिंग बूथ बनाया गया था। इस क्षेत्र के घने जंगलों में पाषाण युग की जनजाति शोम्पेन निवास करती है।
अंडमान और निकोबार के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) केआर मीणा ने कहा, 'शोम्पेन हट में 66 और 22 मतदाताओं वाले दो बूथ हैं। हमारी पोलिंग पार्टी मुश्किल इलाके में मौजूद थी। हालांकि इस साल कोई वोट नहीं पड़ा।' उन्होंने बताया कि घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी सप्ताह में या 15 दिन में राशन लेने के लिए शोम्पेन हट आते हैं।
मीणा ने आगे कहा, 'स्थानीय लोगों ने आदिवासियों को चुनाव के लिए बचे दिनों की संख्या का संकेत देने के लिए कपड़ों पर गांठें बांधी थीं। उन्होंने सांकेतिक भाषा और स्थानीय बोली के जरिए उन्हें सूचित किया था कि उनके यहां 11 अप्रैल को चुनाव होने हैं। लेकिन कोई नहीं आया। शायद स्थानीय लोगों द्वारा किया गया संचार प्रभावी नहीं था या हो सकता है कि वह खुद नहीं आना चाहते हों।'
2014 के लोकसभा चुनाव में शोम्पेन समुदाय के दो सदस्यों ने अपने मताधिकार का इस्तेमान किया था। वहीं जरावस और सेंटीनेलीस अंडमान द्वीप के ऐसे आदिवासी हैं जिन्होंने कभी मतदान नहीं किया है। घने जंगलों में रहने वाले इस आदिवासी समुदाय का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है।