गुजरात के कच्छ जिले के अबडासा क्षेत्र में 10 साल के लंबे इंतजार के बाद 'घोराड़' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के एक बच्चे ने जन्म लिया है। यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। गुजरात के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने इस सफलता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुजरात और राजस्थान के वन विभाग, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने मिलकर इस मिशन को पूरा किया है।
कच्छ में घोड़ाड पक्षियों की आबादी में नर पक्षियों की कमी के कारण, कारण मादा पक्षी जो अंडे देती थी, वे निषेचित नही हो पाते थे, जिसके चलते उनसे बच्चे नहीं निकलते थे। इस चुनौती को दूर करने के लिए 'जंपस्टार्ट अप्रोच' नाम की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
इस योजना के तहत राजस्थान के ब्रीडिंग सेंटर से एक उपजाऊ अंडा लिया गया। इस अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखा गया और 19 घंटे के लंबे सड़क सफर के बाद सुरक्षित कच्छ पहुंचाया गया। 22 मार्च को कच्छ में एक मादा घोराड़ के घोंसले में मौजूद बांझ अंडे को हटाकर उसकी जगह यह उपजाऊ अंडा रख दिया गया। मादा पक्षी ने इस अंडे को प्राकृतिक तरीके से सेया और 26 मार्च को एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ।
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फिलहाल वन विभाग की टीम मादा घोराड़ और उसके बच्चे की लगातार निगरानी कर रही है। वन मंत्री ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और हर्ष संघवी के नेतृत्व में मिली इस सफलता पर खुशी जाहिर की। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस साझा प्रयास की सराहना की है।
साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोराड़ पक्षियों के संरक्षण का विचार रखा था। इसके बाद 2016 में 'प्रोजेक्ट जीआईबी' की शुरुआत हुई। राजस्थान के सैम और रामदेवरा में बने ब्रीडिंग सेंटरों में अब इन पक्षियों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। यह सफलता वैज्ञानिकों, वन अधिकारियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए गर्व का पल है। इससे भारत में वन्यजीवों को बचाने के संकल्प को और मजबूती मिली है।
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