क्या जीपीएस स्पूफिंग शिकार हुआ दिल्ली एयरपोर्ट?
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जानकारी और साइबर हमले
चीन और पाकिस्तान पर आरोप है कि उन्होंने भारत की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने के लिए फर्जी वेबसाइटों और गलत सूचनाओं का इस्तेमाल किया। सरकार समर्थित 'एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट' (एपीटी) समूह भारत की वित्तीय संस्थाओं और सरकारी संस्थानों को निशाना बना चुके हैं, जिनका संबंध चीन, तुर्किये, ईरान आदि देशों से बताया जाता है। इन समूहों ने रैनसमवेयर और डेटा चोरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया। ईरान का 'फॉस्फोरस ग्रुप' इस्राइली और अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बनाते हुए स्पीयर फिशिंग (किसी खास व्यक्ति या समूह को निशाना बनाना) अभियानों में शामिल पाया गया है।
असली कारण: जीपीएस स्पूफिंग या तकनीकी गड़बड़ी?
हालांकि शुक्रवार की देरी को एटीसी सिस्टम की समस्या बताया गया, लेकिन जांच में यह बात सामने आ रही है कि जीपीएस सिग्नल की गड़बड़ी भी एक बड़ा कारण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को नेविगेशन इंटीग्रिटी कैटेगरी वैल्यू, जो विमान की स्थिति की सटीकता मापती है, सामान्य स्तर 8 से गिरकर 0 पर आ गई थी। यह स्थिति बेहद असामान्य मानी जाती है।
डीजीसीए ने मामले की जांच शुरू की
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए)ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पायलटों ने बताया कि यह गड़बड़ी दिल्ली से 60 नॉटिकल मील (लगभग 110 किमी) की सीमा में ज्यादा दिखाई दी।
क्या है जीपीएस स्पूफिंग?
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आईएलएस बंद होने से बढ़ी दिक्कत
दिल्ली एयरपोर्ट के मुख्य रनवे का इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) फिलहाल अपग्रेड के लिए बंद है। इसे कैटेगरी-III सिस्टम में बदला जा रहा है, जिससे सर्दियों में घने कोहरे के बीच भी दोनों दिशाओं से लैंडिंग संभव हो सकेगी। इस सिस्टम के अस्थायी रूप से बंद रहने के कारण विमान अब सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन पर निर्भर हैं, जो उन्हें स्पूफिंग के लिए अधिक संवेदनशील बनाता है।
क्या है जीपीएस स्पूफिंग?
जीपीएस स्पूफिंग एक साइबर हमला है, जिसमें नकली सिग्नल भेजकर किसी भी डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई जाती है। जैसे आपके फोन की लोकेशन अचानक चार किमी दूर दिखने लगे, वैसा ही विमानों के साथ होता है। जब यह विमान के साथ होता है, तो उसका नेविगेशन सिस्टम गलत दिशा में जा सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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बॉर्डर इलाकों में जीपीएस स्पूफिंग आम, अब दिल्ली में असर
इससे पहले भारत सरकार ने लोकसभा में बताया था कि नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच 465 जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र (अमृतसर और जम्मू) में दर्ज की गईं। वहीं अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में 4.3 लाख जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2023 की तुलना में 62% अधिक हैं।
भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी शिकार
जीपीएस स्पूफिंग की घटना दुनिया के तमाम देशों में भी देखने को मिली है। दिसंबर 2024 में कजाकिस्तान में अजरबैजान एयरलाइंस का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 38 लोग मारे गए। इस हादसे के लिए यह माना जाता है कि यह जीपीएस स्पूफिंग और जैमिंग के कारण रूसी रक्षा प्रणाली की गलती से हुआ। वहीं मार्च 2025 में म्यांमार में राहत सामग्री लेकर जा रहे भारतीय वायुसेना के विमान को भी चीन समर्थित सिस्टम से जीपीएस स्पूफिंग का सामना करना पड़ा।