दिल्ली धमाके की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने अल फलाह विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड की फोरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं। गृह मंत्री अमित शाह की बैठक के बाद ईडी और अन्य एजेंसियों को मनी ट्रेल की जांच का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय पर केंद्रित हो गया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को विश्वविद्यालय के सभी रिकॉर्ड की फोरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य वित्तीय एजेंसियों को संस्थान की फंडिंग और मनी ट्रेल की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सूत्रों के अनुसार, यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया। बैठक में लगभग डेढ़ घंटे तक दिल्ली धमाके की जांच की प्रगति पर चर्चा हुई। इस दौरान गृह मंत्री ने जांच एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी साजिश को बख्शा नहीं जाएगा।
अल फलाह विश्वविद्यालय की भूमिका संदिग्ध
अल फलाह विश्वविद्यालय फरीदाबाद जिले के धौज इलाके में स्थित है और इसके परिसर में एक मेडिकल कॉलेज व अस्पताल भी संचालित होता है। अधिकारियों ने बताया कि जिस कार में धमाका हुआ, उसे चला रहा उमर नबी इसी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर था। धमाके के बाद तीन डॉक्टरों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनका संबंध इसी संस्थान से बताया जा रहा है।
विश्वविद्यालय का बयान
अल फलाह विश्वविद्यालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि वह पूरी तरह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है। संस्थान ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के पक्ष में है। वहीं, ईडी और अन्य एजेंसियां विश्वविद्यालय के खातों, फंड ट्रांसफर और विदेशी लेनदेन की गहन जांच कर रही हैं ताकि मनी ट्रेल का पूरा खुलासा हो सके।
व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल
10 नवंबर को लाल किले के पास खड़ी एक कार में हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ से जुड़ा आतंकी हमला था, जिसमें कई शिक्षित लोग शामिल थे। आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अब वित्तीय लिंक और संगठित नेटवर्क की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।