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आधार संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक से फिलहाल SC का इनकार

Fri, 19 May 2017 09:06 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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आधार कार्ड - फोटो : Getty Images
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मिड डे मिल सहित कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार को जरूरी करने से संबंधित केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 
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न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि आधार से संबंधित याचिकाओं पर ‘टुकड़ों’ में सुनवाई नहीं हो सकती। 

पीठ ने कहा कि बेहतर है कि आधार के खिलाफ दाखिल तमाम अंतरिम आवेदनों पर एक साथ सुनवाई हो। पीठ ने सभी आवेदनों पर 27 जून को सुनवाई का निर्णय लिया है। पीठ शुक्रवार को शांता सिन्हा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि आधार को लेकर पूर्व में दायर की गई याचिकाओं पर पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आदेश पारित किया था। ऐसे में इस याचिका पर भी संविधान पीठ के समक्ष ही सुनवाई होनी चाहिए। 
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अटॉर्नी जनरल ने यह भी साफ किया कि सरकार मिड डे मिल, सर्व शिक्षा अभियान सहित कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के लिए आधार को जरूरी बनाने की अंतिम तिथि को आगे नहीं बढ़ाने जा रही है। 
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अदालत आम नागरिकों के लिए हमेशा उपलब्ध है

सुप्रीम कोर्ट
अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘करीब 120 करोड़ लोगों ने आधार बनवाया है। जिन लोगों को वास्तव में इन योजनाओं का लाभ उठाना है वे अदालत के समक्ष नहीं है, लेकिन जो लोग इससे प्रभावित नहीं हैं वे एक के बाद एक याचिका दायर कर रहे हैं।’ उन्होंने अदालत से कहा कि इस तरह की याचिका पिछले साल भी दायर की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। 

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि पूर्व में दायर याचिकाएं एक समान हो सकती हैं, लेकिन यह याचिका बिल्कुल अलग है। पूर्व में जब याचिकाएं दायर की गई थीं तब सरकार की ओर से अधिसूचनाएं नहीं आई थीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में अदालत ने कहा था कि सरकार आधार को अनिवार्य नहीं कर सकती, लेकिन सरकार इस आदेश का उल्लंघन कर रही है। सरकार मेरिट के आधार पर जवाब देने से बच रही है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार 20 बार ऐसे मामलों में बहस कर चुकी है।

आम नागरिकों के लिए हम हमेशा उपलब्ध रहते हैं : सुप्रीम कोर्ट
अदालत में याचिकाकर्ता के वकील श्याम दीवान ने कहा कि तकनीकी आधार पर जनहित याचिकाकर्ताओं को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट भेजना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि अदालत इस मामले में सुनवाई करने से बच रही है। इस पर आपत्ति जताते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि याकूब मेमन मामले की सुनवाई के लिए उन्हें रात दो बजे अदालत में बुलाया गया था। 

अदालत ने दीवान से कहा, ‘आप ऐसा न कहें कि अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध नहीं है। अदालत आम नागरिकों के लिए हमेशा उपलब्ध है।’ इसके साथ ही पीठ ने सुनवाई 27 जून के लिए टालते हुए कहा कि इस मामले पर उचित पीठ सुनवाई करेगी।
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