प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र का जिक्र छेड़ने के बाद पाकिस्तान को उसी के अंदाज में कूटनीतिक जवाब देने के लिए अब पीओके में शरणार्थियों के लिए 2000 करोड़ रुपये का पैकेज देने की तैयारी कर ली है। कश्मीर मामले पर अंतरराष्ट्रीयकरण की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान के लिए मोदी सरकार का यह कदम बड़ा झटका साबित हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय जल्द ही मंजूरी के लिए इस पैकेज का ब्योरा केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रख सकता है।
इस कूटनीतिक रणनीति को अमली जामा पहनाने केलिए सरकार ने देश में रह रहे ऐसे करीब 36,348 शरणार्थियों की पहचान भी कर ली है। पैकेज संबंधी मसौदा सितंबर महीने में केंद्रीय कैबिनेट के विचारार्थ पेश किए जाने की योजना है जिसकी मंजूरी के बाद प्रत्येक विस्थापित परिवार को 5.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। अधिकारी ने बताया, ‘हमें उम्मीद है कि कैबिनेट से एक महीने के अंदर पैकेज को मंजूरी मिल जाएगी और लाभार्थियों में फंड बांट दिया जाएगा।’
ये सभी शरणार्थी पश्चिमी पाकिस्तान, खासकर ज्यादातर पीओके के हैं जो जम्मू, कठुआ और राजौरी जिलों के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर के संविधान की शर्तों के मुताबिक, ये सभी राज्य के स्थायी निवासी नहीं हो सकते। इसके अलावा सरकार बेंगलुरू में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में पीओके के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का मन बना रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस फैसले पर भी लगभग सहमति बन चुकी है।