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देश के कई एयरपोर्ट्स पर ड्रोन हमले का खतरा, सरकार कर रही जैमर लगाने की तैयारी

Sat, 28 Sep 2019 02:49 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
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guardian drone
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पाकिस्तान की ओर से आ रहे ड्रोन और आतंकी हमले के अलर्ट को देखते हुए देश के 100 एयरपोर्ट को रेड जोन में शामिल कर दिया गया है। इनमें से 61 एयरपोर्ट्स पर सीआईएसएफ तैनात है और बाकी के 39 एयरपोर्ट की सुरक्षा संबंधित राज्यों की पुलिस के हवाले है। इसके अलावा न्यूक्लियर एवं स्पेस से जुड़े संस्थान, पावर प्लांट (गैस, थर्मल और हाइड्रो), संवेदनशील सरकारी भवन और रक्षा उत्पाद यूनिट्स भी रेड जोन में आ गई हैं। यहां पर ड्रोन को मार गिराने के लिए चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।

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एयरपोर्ट और संवेदनशील भवनों के आसपास ड्रोन को निष्क्रिय करने के लिए जैमर तकनीक की मदद ली जाएगी। इस बाबत एनएसजी ने एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा कर लिया है। उनकी तरफ से फाइनल मंजूरी मिलने के बाद सभी एयरपोर्ट पर ड्रोन को जाम करने वाले उपकरण लगा दिए जाएंगे।

पाकिस्तान किसी बड़े हमले की फिराक में

बता दें कि पंजाब में ड्रोन की मदद से भारी मात्रा में हथियार गिराए जाने की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। आतंकवादी समूह अब हैवी ड्रोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। पंजाब पुलिस ने हाल ही में हथियारों की खेप ला रहे जिस ड्रोन को मार गिराया था, उसमें 5 एके-47 राइफल, पिस्तौल, सैटेलाइट फोन और हथगोले सहित भारी मात्रा में हथियार रखे गए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत दोभाल और आर्मी चीफ बिपिन रावत की ओर से लगातार आ रहे बयानों में आतंकी हमले की संभावना जताई जा रही है। पाकिस्तान किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की तैयारी में है, इसके चलते अजीत दोभाल दूसरी बार कश्मीर में पहुंच गए हैं।

बालाकोट में आतंंकी फिर जमा

आर्मी चीफ ने भी कह दिया है कि बालाकोट के आसपास दोबारा से आतंकी जमा होने लगे हैं। वहां करीब पांच सौ आतंकी भारत में घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। कुछ इनपुट ऐसे भी मिले हैं, जिनमें एयरपोर्ट और दूसरे संवेदनशील भवनों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। यही वजह है कि एयरपोर्ट और संवेदनशील भवनों को अब हाई अलर्ट यानी रेड जोन में शामिल कर दिया गया है।

हवाई जहाजों पर ड्रोन हमले का खतरा

भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही तनातनी को लेकर देश के सभी एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। मौजूदा समय में जिस तरह के इंटेलीजेंस इनपुट आ रहे हैं, उनमें ड्रोन से हमला करना भी एक बड़ा खतरा है। एयरपोर्ट के अलावा हवाई जहाजों को भी ड्रोन से निशाना बनाया जा सकता है। हवाई जहाज टेक ऑफ और लैंडिंग के दौरान जब सात-आठ सौ मीटर की उंचाई पर होता है, तो उसकी राह में ड्रोन आ सकता है। हवाई-जहाजों के करीब ड्रोन न आने पाए, इसके लिए एटीसी को खास हिदायतें जारी की गई हैं।

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जैसे ही किसी ड्रोन की सूचना एटीसी को दी जाएगी, तुरंत वह इनपुट पायलट के पास पहुंचाया दिया जाएगा। पायलट बिना किसी देरी के अपना रास्ता बदल लेंगे। एयरपोर्ट पर ड्रोन से निपटने के लिए चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी...

सीआईएसएफ को किया तैयार

देश के 61 बड़े एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सीआईएसएफ संभाल रही है। इनके अलावा 39 अन्य एयरपोर्ट पर संबंधित राज्यों की पुलिस या दूसरे सुरक्षा बल तैनात हैं। ड्रोन हमले के खतरे को देखते हुए अब सौ एयरपोर्ट को रेड जोन में शामिल कर लिया गया है। इसके चलते एयरपोर्ट पर चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। सीआईएसएफ, एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर), एयरफोर्स और लोकल पुलिस की स्पेशल यूनिट ड्रोन पर नजर रखेगी। ये चारों एजेंसियां संयुक्त मेकेनिज्म पर काम करेंगी।

ड्रोन मार गिराने की जिम्मेदारी एयरफोर्स की

किसी भी एयरपोर्ट के निकट कोई ड्रोन दिखाई पड़ा, तो उसे बिना किसी देरी के मार गिराया जाएगा। सीआईएसएफ को एलएमजी सहित दूसरे ऐसे हथियार मुहैया करा दिए गए हैं, जिनकी मारक क्षमता छह सौ मीटर तक है। अगर इससे उपर कोई ड्रोन है तो उसे मार गिराने या जब्त करने की जिम्मेदारी एयरफोर्स की रहेगी। चारों एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान प्रदान बिना किसी देरी के हो, इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल शुरु किया जा रहा है।

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सीआईएसएफ के डीआईजी (ऑपरेशन) अनिल कुमार पांडे का कहना है कि सीआईएसएफ ने ड्रोन हमले के खतरे से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। एटीसी, एयरफोर्स, सीआईएसएफ व लोकल पुलिस की यूनिट मिलकर ड्रोन हमले को नाकाम कर देंगे। सभी एयरलाइंस को कुछ हिदायतें जारी की गई हैं।

जैमर रोकेगा ड्रोन

ड्रोन की दिशा का पता करने के लिए अभी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस उपकरणों पर काम चल रहा है। इसमें जैमर की मदद से ड्रोन का संचार सिस्टम ठप किया जा सकता है। सिविल एविएशन मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय मिलकर इस योजना पर काम कर रहे हैं। इससे जुड़े कई उपकरणों का ट्रायल चल रहा है। सीआईएसएफ अधिकारी के मुताबिक, जैमर को लेकर पायलट प्रोजेक्ट पर काफी काम हो गया है। उम्मीद है कि जल्द ही एयरपोर्ट और दूसरे संवेदनशील भवनों पर ऐसे जैमर लगा दिए जाएं, जिससे ड्रोन उसके करीब आते ही खुद-ब-खुद जमीन पर गिर जाएं।

हालांकि ये जैमर ऐसे हैं जो ड्रोन हमले को किसी भी संस्थान से दो तीन सौ मीटर की दूरी पर ही रोक देंगे। ड्रोन अपने टारगेट तक नहीं पहुंच सकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम पूरी तरह से शुरु होने के बाद इस तरह के आतंकी खतरों का समय रहते अलर्ट मिल जाएगा। 

यहां है ड्रोन हमले का खतरा

  • न्यूक्लियर संस्थान 
  • स्पेस से जुड़े संस्थान 
  • पावर प्लांट (गैस, थर्मल और हाइड्रो) 
  • संवेदनशील सरकारी भवन 
  • रक्षा उत्पाद यूनिट 
  • फर्टिलाइजर एंड केमिकल 
  • बंदरगाह 
  • ऑयल रिफायनरी 
  • दिल्ली मेट्रो
  • हेरिटेज बिल्डिंग 
  • प्राइवेट सेक्टर ज्वाइंट वेंचर 
  • नोट प्रिंटिंग मशीन 
  • वीआईपी सिक्योरिटी 
  • कोल एंड आयरन माइनिंग
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