जल विद्युत परियोजनाओं के प्रोत्साहन व उनके काम में तेजी लाने के लिए बिजली मंत्रालय नए तरीके से कार्य योजना बना रहा है। इस कार्ययोजना के तहत
जल विद्युत परियोजनाओं की लागत में कमी व विभिन्न प्रकार की मंजूरी के नाम पर होने वाली देरी को समाप्त करने का प्रस्ताव है। बिजली मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक हम लोग जल विद्युत परियोजना के विकास के लिए फ्रेमवर्क बना रहे हैं और जल्द ही इसे कैबिनेट तक लाया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक जल विद्युत अन्य के मुकाबले अधिक स्वच्छ है, हरित है और लंबे समय तक टिक सकता है।
उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं की अधिक लागत बड़ी चुनौती हैं। मंत्रालय इसकी वित्तीय पुनर्संरचना पर विचार कर रहा है। मंत्रालय के मुताबिक जल विद्युत परियोजना की स्थापना में लागत अधिक होने की वजह से सार्वजनिक कंपनियों के अलावा निजी निवेश में कमी आ रही है। मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है कि इसकी लागत को कैसे कम किया जाए ताकि जल विद्युत की दरें कम हो सके।
मंत्रालय इस बात पर भी गौर कर रहा है कि जल विद्युत परियोजना की स्थापना से पहले ली जाने वाली विभिन्न प्रकार की मंजूरी में होने वाली देरी को कैसे कम किया जाए या समाप्त किया जाए। मंत्रालय स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर वित्तीय सहायता के किसी नवीन मॉडल लाने पर विचार कर रहा है। सकार के इन उपायों से जल विद्युत में निवेश करने वाले निवेशकों में उत्साह आने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में जल विद्युत की कई परियोजनाएं पिछले कई सालों से लंबित हैं। अरुणाचल प्रदेश की सरकार का कहना है कि जल विद्युत में निजी निवेश करने वाले डेवलपर्स को वहां पूरी मदद दी जाएगी। देश भर में कई जल विद्युत परियोजनाएं पिछले कई सालों से मंजूरी मिलने में देरी की वजह से अटकी पड़ी है।