2018 में लागू किया गया था एफएमआर
मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरने वाली 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर फिलहाल एफएमआर है। इसे 2018 में भारत की एक्ट ईस्ट नीति (पॉलिसी) के हिस्से के रूप में लागू किया गया था।
दो सप्ताह तक सीमा पार कर रह सकता है यात्री
एफएमआर के तहत पहाड़ी जनजातियों का सदस्य, जो या तो भारत का नागरिक है या म्यांमार का नागरिक है और जो सीमा के दोनों ओर 16 किमी के भीतर किसी भी क्षेत्र का निवासी है, एक वर्ष की वैधता के साथ सीमा पास प्रस्तुत करके सीमा पार कर सकता है और प्रति यात्रा दो सप्ताह तक रह सकता है।
चार साल में पूरा होगा बाड़ लगाने का काम
उन्होंने कहा, 'हम भारत-म्यांमार सीमा पर एफएमआर को जल्द ही समाप्त करने जा रहे हैं। हम पूरी सीमा पर बाड़ लगाने जा रहे हैं। बाड़ लगाने का काम अगले साढ़े चार साल में पूरा हो जाएगा। जो भी यहां से आ रहा है, उसे वीजा प्राप्त करना होगा।'
एफएमआर का दुरुपयोग करते हैं विद्रोही समूह
इसका मकसद न केवल एफएमआर के दुरुपयोग को रोकना है, जिसका इस्तेमाल विद्रोही समूहों द्वारा भारतीय पक्ष पर हमले करने और म्यांमार की ओर भागने के लिए किया जाता है, बल्कि अवैध प्रवासियों की आमद को रोकना और मादक पदार्थों व सोने की तस्करी के नेटवर्क को पंगु बनाना भी है।
मणिपुर ने उठाई थी एफएमआर खत्म करने की मांग
भारत-म्यांमार सीमा के 300 किलोमीटर के लिए एक स्मार्ट बाड़ प्रणाली के लिए निविदा पहले से ही पाइपलाइन में है और काम बहुत जल्द शुरू किया जाएगा। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने सितंबर 2023 में केंद्र से एफएमआर को समाप्त करने का आग्रह किया था। राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि विद्रोही अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए मुक्त आवाजाही व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं।
मणिपुर म्यांमार के साथ लगभग 390 किलोमीटर की खुली सीमा साझा करता है और अब तक केवल 10 किलोमीटर पर बाड़ लगाई गई है। पिछले साल जुलाई में, राज्य सरकार ने आंकड़े साझा किए थे कि लगभग 700 अवैध प्रवासियों ने राज्य में प्रवेश किया। मणिपुर के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि म्यांमार से कई लोगों ने उनके राज्य में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी देखकर वे लौट गए। मणिपुर म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर की सीमा साझा करता है।
मिजोरम में हजारों की संख्या में जुंटा विरोधी शरणार्थी
इसके अलावा, एक फरवरी 2021 को म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद से मिजोरम में हजारों की संख्या में जुंटा विरोधी विद्रोहियों की आमद देखी गई है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, तख्तापलट के बाद से मिजोरम के विभिन्न हिस्सों में कई हजार शरणार्थी रह रहे हैं। मिजोरम म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। अरुणाचल प्रदेश म्यांमार के साथ 520 किलोमीटर की सीमा साझा करता है जबकि नागालैंड देश के साथ 215 किलोमीटर की सीमा साझा करता है।