केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पहली बार निर्माण और ध्वस्तीकरण से संबंधित कचरे के प्रबंधन के लिए नियमावली तय की है। इसमें कई कड़े प्रावदान किए गए हैं।
नियमावली के तहत दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के स्थानीय निकायों के लिए 18 महीने के अंदर निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के प्रबंधन के लिए प्लांट लगाना अनिवार्य कर दिया है। पांच से दस लाख तक की आबादी वाले शहरों को दो साल में और 5 लाख तक की आबादी वाले शहरों को तीन साल के अंदर ऐसे प्लांट लगाने होंगे। बिल्डरों के लिए कचरा प्रबंधन योजना सौंपना अनिवार्य किया गया है।
अगर बिल्डर ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें निर्माण की अनुमति नहीं मिल सकेगी। पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए ऐसा अहम कदम उठाया गया है। वर्तमान में निर्माण और ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में हर साल 53 करोड़ टन कचरा पैदा होता है। यह खुले स्थानों और नदियों के पास डाल दिया जाता रहा है।
नियमावली के अभाव में ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। जावड़ेकर ने बताया कि बायो मेडिकल कचरा प्रबंधन की नई नियमावली को भी अधिसूचित कर दिया गया है।