केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाले वीबी-जी राम जी एक्ट, 2025 के लिए अंतर-मंत्रालयी बैठक की। इस कानून के तहत ग्रामीण विकास योजनाओं में बेहतर समन्वय के लिए 'सिंगल प्लान-मल्टी फंडिंग' मॉडल अपनाया जाएगा। विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) को केंद्र में रखकर जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका और जलवायु चुनौतियों से जुड़े कार्यों पर जोर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने जा रहे ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी वीबी-जी राम जी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में बुधवार को ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक आयोजित की गई। बैठक में 18 मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों तथा नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और पंचायत आधारित विकास योजना को मजबूत बनाना था। सरकार का मानना है कि जल सुरक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचे का विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने जैसे लक्ष्यों को कई योजनाओं के साझा प्रयासों से अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।
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अधिनियम के तहत 'सिंगल प्लान-मल्टी फंडिंग' मॉडल अपनाया जाएगा। इसका मतलब है कि अलग-अलग सरकारी योजनाएं अपने-अपने बजट और उद्देश्यों को बनाए रखते हुए एक साझा विकास योजना के तहत काम करेंगी। इस ढांचे में ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (वीजीपीपी) को केंद्र में रखा गया है। यह योजना ग्राम सभा की मंजूरी और स्थानीय लोगों की भागीदारी से तैयार होगी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं के संसाधनों को गांवों की जरूरतों के अनुसार जोड़ा जाएगा।
सरकार ने चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, जिनमें जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, ग्रामीण आजीविका और अत्यधिक मौसम संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए विशेष कार्य शामिल हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने 318 प्रकार के कार्यों की अंतरिम सूची भी जारी की है, जिनमें सिंचाई, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण संपर्क, सामुदायिक ढांचा और जलवायु अनुकूल विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि 1 जुलाई से यह नया ढांचा लागू होने के बाद ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल आएगा तथा गांवों के समग्र विकास को गति मिलेगी।