रेड जोन में स्थित अधिकांश व्यावसायिक और निजी प्रतिष्ठान अपना कामकाज शुरू करेंगे। इनमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आईटी व इससे संबंधित सक्षम सेवाएं, डेटा कॉल सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउसिंग सेवाएं, निजी सुरक्षा और सुविधा प्रबंधन सेवाएं व सैलून आदि को छोड़कर केवल स्व-नियोजित व्यक्तियों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं शामिल रहेंगी।
दवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों, उनके कच्चे माल, आवश्यक वस्तुओं की विनिर्माण इकाइयों, निरंतर प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता वाली उत्पादन इकाइयों को अलग-अलग पारियों में काम करने के लिए कहा गया है।
इन सभी कार्यों में सैनिटाइजर और दो गज की दूरी के नियम सख्ती से पालन करना होगा। इसी तरह सामाजिक दूरी को बरकरार रखते हुए जूट उद्योग और आईटी हार्डवेयर की विनिर्माण एवं पैकेजिंग सामग्री तैयार करने वाली विनिर्माण इकाइयों को भी कामकाज की अनुमति प्रदान की गई है।
ऑरेंज और रेड जोन में स्वीकृत की गई गतिविधियों के अलावा, टैक्सी व कैब एग्रीगेटर्स को केवल 1 ड्राइवर और 2 यात्रियों के साथ चलने की अनुमति दी जाएगी। एक जिले से दूसरे जिले में आने वाले लोगों और वाहनों को केवल स्वीकृत गतिविधियों के लिए मंजूरी मिलेगी।
चार पहिये वाले वाहनों में ड्राइवर के अलावा अधिकतम दो यात्री बैठ सकेंगे। दोपहिया वाहनों पर दूसरी सवारी बैठाने की अनुमति दी गई है।
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में परिभाषित किया है। जिलों की पहचान करने के मापदंड भी तैयार किए गए हैं।
ग्रीन जोन में ऐसे जिले शामिल किए गए हैं, जहां पर अभी तक कोरोना संक्रमण का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है या पिछले 21 दिनों में कोई पुष्ट मामला देखने को नहीं मिला।
रेड जोन के रूप में जिलों का वर्गीकरण करते समय सक्रिय मामलों की कुल संख्या, कंफर्म मामलों के दोगुना होने की दर, जिलों से प्राप्त कुल परीक्षण (टेस्टिंग) और निगरानी सुविधा संबंधी जानकारियों को ध्यान में रखा जाएगा।
बहुत से राज्यों में अनेक ऐसे भी जिले हैं, जिन्हें न तो रेड जोन और न ही ग्रीन जोन में रखा गया है। ऐसे जिलों को ऑरेंज जोन का हिस्सा बनाया गया है।
रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के रूप में जिलों के वर्गीकरण को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हर सप्ताह या आवश्यकतानुसार उससे पहले साझा किया जाएगा।
राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश कुछ नए जिलों को रेड व ऑरेंज जोन में शामिल कर सकते हैं, लेकिन वे किसी ऐसे जिले के वर्गीकरण को घटा नहीं सकते हैं, जिसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रेड या ऑरेंज जोन की सूची में शामिल किया हो।