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PMFBY: जंगली जानवरों से फसल नुकसान और बाढ़ से प्रभावित धान की खेती अब फसल बीमा योजना के दायरे में

Tue, 18 Nov 2025 05:44 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों को बड़ी राहत देते हुए जंगली जानवरों द्वारा फसलों के नुकसान और धान जलभराव को आधिकारिक रूप से बीमा कवर में शामिल कर लिया है। यह फैसला लंबे समय से विभिन्न राज्यों द्वारा की जा रही मांग के बाद लिया गया है। सरकार का यह फैसला किसान हितों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, जंगली जानवरों से फसल नुकसान को स्थानीयकृत जोखिम श्रेणी के पांचवें ‘ऐड-ऑन कवर’ के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत राज्य सरकारें प्रभावित जिलों और बीमा इकाइयों की पहचान ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर करेंगी। फसल नुकसान की स्थिति में किसान 72 घंटे के भीतर फसल बीमा एप पर जियो-टैग्ड फोटो के साथ सूचना दर्ज कर सकेंगे।

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जो हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण और बंदरों जैसे जंगली जानवरों के हमलों का लंबे समय से सामना कर रहे हैं। वन क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों के नजदीक बसे किसान सबसे अधिक प्रभावित होते रहे हैं। अब तक ऐसे नुकसान फसल बीमा योजना में शामिल न होने से किसानों को भारी आर्थिक हानि झेलनी पड़ती थी।
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इसी तरह, धान जलभराव को स्थानीयकृत आपदा श्रेणी में फिर से शामिल कर दिया गया है। इससे तटीय और बाढ़ संभावित राज्यों में ओडिशा, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के किसानों को बड़ा लाभ होगा, जहां हर वर्ष जलभराव से धान की फसल को भारी नुकसान होता है।

इन चुनौतियों के समाधान के लिए मंत्रालय ने विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंजूरी दी। नई प्रक्रियाएं वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यवहारिक रखी गई हैं और खरीफ 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। इन नए प्रावधानों के लागू होने से ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा।

कुल मिलाकर, जंगली जानवरों से फसल नुकसान और धान जलभराव का PMFBY में शामिल होना योजना को और अधिक समावेशी, उत्तरदायी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, जो देश की फसल बीमा प्रणाली को और मजबूत व लचीला बनाएगा।

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