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आरक्षण को लेकर कब-कब हुआ विवाद और क्या हुआ परिणाम

Sat, 30 Apr 2016 04:17 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • आरक्षण को लेकर बयानबाजी
  • 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण
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ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पटेल आरक्षण आंदोलन के दबाव के मद्देनजर गुजरात की भाजपा सरकार ने सामान्य वर्ग में पाटीदारों सहित आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है। जनता के दबाव में आकर सरकारों का आरक्षण में बदलाव करना नया नहीं है। इससे पहले भी कई बार सरकार ने बदलाव किए हैं
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आइए जानते हैं।

आरक्षण : घटनाक्रम 
1950 : संविधान में सामाजिक रूप से पिछड़ों के लिए आरक्षण की व्यवस्था।
1951: अजा के लिए 12.5 तथा अजजा के लिए छह फीसदी आरक्षण तय हुआ।
1970 : तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे बढ़ाकर अजा के लिए 15 तथा अनुसूचित जन जाति के लिए 7.5 फीसदी किया।
1980 : ओबीसी को मंडल कमीशन ने 37 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की।
1990 : मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा।
1992 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरक्षण 50 फीसदी से अधिक न हो।
1993 : नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण लागू।

आरक्षण को लेकर बयानबाजी

प्रदर्शन करते जाट - फोटो : अमर उजाला
सितंबर 2011 : उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की केंद्र सरकार से मांग की। इसके साथ ही निजी क्षेत्र को भी आरक्षण के दायरे में लाने की वकालत की। मायावती ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर मुस्लिम व जाट समाज के आरक्षण कोटा बढ़ाए जाने तथा सभी मामलों में आरक्षण दिए जाने की भी वकालत की थी।

सितंबर 2015 : बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा पर जोर दिया। हालांकि बवाल मचने के बाद वह खुद आरक्षण की वकालत करने लगे।

22 फरवरी 2016 : कोलकाता में चैंबर ऑफ कॉमर्स में बातचीत के एक सत्र के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरक्षण की पात्रता पर फैसला करने के लिए एक गैर-राजनीति समिति का गठन किया जाना चाहिए। समिति को गैर-राजनीतिक होना चाहिए ताकि कोई निहित स्वार्थ शामिल न हो।
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50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण

रिजर्वेशन
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

- इसके बावजूद तमिलनाडु में 69 फीसदी, राजस्थान में 68 फीसदी और महाराष्ट्र में 73 फीसदी आरक्षण दिया गया।

- नवंबर 2014 में बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में 21 फीसदी (मराठा 16 फीसदी और मुस्लिम 5 फीसदी) आरक्षण देने पर रोक लगा दी।

- राजस्थान और तमिलनाडु के मामलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

- हरियाणा में हाल ही में जाट समेत 6 जातियों को बीसी-सी श्रेणी के तहत आरक्षण दिया गया है। इसके बाद वहां आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 67 हो गया। इसे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
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