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'पूरा भरोसा था सरकार का’: 2020 चीन तनाव पर पूर्व सेना प्रमुख नरवणे बोले- कोई कमी नहीं थी पीएम मोदी के आदेश में

Fri, 24 Apr 2026 02:36 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 2020 चीन तनाव पर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि सेना को स्पष्ट आदेश की कमी नहीं थी। उन्होंने राहुल गांधी के आरोप खारिज करते हुए बताया कि उस समय जो सही लगे, वही करें निर्देश भरोसे का संकेत था, जिससे सेना को पूरी कार्रवाई की आजादी मिली।

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जनरल एमएम नरवणे, पूर्व सेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 2020 में चीन के साथ हुए तनाव को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर अपनी स्थिति साफ की है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उस समय सेना को स्पष्ट निर्देश नहीं मिले थे। बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि तनाव के दौरान सेना नेतृत्व को राजनीतिक स्तर पर अकेला छोड़ दिया गया था, खासकर रेजांग ला इलाके में हालात के दौरान।

जनरल नरवणे ने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री की तरफ से निर्देश दिया गया था कि आप सही समझें, वही करें, उनके लिए भरोसे का संकेत था, न कि आदेश की कमी। उन्होंने कहा कि इसका मतलब था कि सेना को पूरी आजादी दी गई थी, क्योंकि जमीन की स्थिति और सैनिकों की क्षमता का सबसे अच्छा अंदाजा सेना को ही होता है।

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मैं खुद को अकेला महसूस नहीं कर रहा था- नरवणे
इस दौरान पूर्व सेना प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि वे उस समय खुद को कभी अकेला महसूस नहीं कर रहे थे। उनके मुताबिक, पूरे देश और सरकार का समर्थन सेना के साथ था और जो भी फैसला लिया जाता, उसे पूरा समर्थन मिलता। गोली चलाने के आदेश पर उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार पहले से ही होता है। अगर जान या सीमा की सुरक्षा पर खतरा हो, तो सैनिक तुरंत कदम उठा सकते हैं।

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अपनी किताब को लेकर भी साफ किया रुख
इसके साथ ही नरवणे ने अपनी किताब लेकर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि उनकी किताब फिलहाल रक्षा मंत्रालय की समीक्षा में है, इसलिए उसके बारे में ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे। नरवणे ने यह भी कहा कि 2020 के तनाव के दौरान सेना के अधिकारियों और जवानों ने मजबूती से काम किया, जिसकी वजह से भारत बातचीत में मजबूत स्थिति में रहा।

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